विदेश मंत्री एस. जयशंकर का बड़ा बयान, कहा– दुनिया और मुश्किल होती जा रही है, बड़े देश तय कर रहे हैं दिशा
न्यूयॉर्क में एशिया सोसाइटी को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वैश्विक हालातों, 4F संकट और भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताओं पर खुलकर अपनी बात रखी।
संयुक्त राष्ट्र (UN) हाई-लेवल वीक के समापन अवसर पर न्यूयॉर्क में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने एशिया सोसाइटी को संबोधित किया। मौजूदा वैश्विक हालात और भू-राजनीतिक उथल-पुथल की ओर इशारा करते हुए विदेश मंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि कड़वा सच यह है कि आज की यह दुनिया बेहद मुश्किल दौर से गुजर रही है और हालात दिन-ब-दिन और अधिक जटिल होते जा रहे हैं, जहां वैश्विक स्तर पर बड़े देश ही इसकी दिशा और दशा तय कर रहे हैं।
🌍 दो बड़े संघर्षों और वैश्विक तनावों का सामना कर रही दुनिया, मिडिल ईस्ट से लेकर अफ्रीका तक फैली अशांति
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने संबोधन में आगे कहा कि वर्तमान समय में दुनिया के हालात काफी गंभीर नजर आ रहे हैं, क्योंकि इस वक्त वैश्विक मंच पर दो बड़े और प्रमुख संघर्ष चल रहे हैं, जिनका सीधा असर दुनिया के हर छोटे-बड़े देश पर पड़ रहा है। मिडिल ईस्ट (जिसे हम पश्चिम एशिया भी कहते हैं) में हालात बेहद संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। इसके अलावा अफ्रीकी महाद्वीप में भी कई गंभीर संघर्ष जारी हैं, विशेषकर सूडान में हालात चिंताजनक हैं और इसके प्रभाव अन्य क्षेत्रों में भी महसूस किए जा रहे हैं।
🌾 दुनिया का एक बड़ा हिस्सा '4F संकट' की चपेट में, सप्लाई चेन और तकनीक को लेकर भी बढ़ी चिंताएं
एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने दिए गए भाषण का जिक्र करते हुए दोहराया कि दुनिया का एक बहुत बड़ा हिस्सा उस गंभीर संकट से जूझ रहा है जिसे उन्होंने '4F संकट' यानी फूड (भोजन), फ्यूल (ईंधन), फर्टिलाइजर (खाद) और फाइनेंस (वित्त) का संकट करार दिया है। इसके साथ ही वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन में कमजोरियां लगातार बढ़ती जा रही हैं, सतत विकास लक्ष्य (SDG) अपने तय लक्ष्यों से पीछे छूट रहे हैं, और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल व सुरक्षा को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहरी चिंताएं बनी हुई हैं।
🤝 व्यापार समझौतों और ट्रेड टॉक्स पर बोले जयशंकर, कहा– भारत और अमेरिका का आर्थिक ढांचा है काफी अलग
भारतीय-अमेरिकी समुदाय, प्रवासी भारतीयों और प्रतिष्ठित नीति विशेषज्ञों को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि व्यापार और कूटनीति से जुड़ी बातचीत की जमीनी हकीकत आज “कहीं ज्यादा जटिल” हो चुकी है, जिसका असर ट्रेड टॉक्स पर साफ देखा जा सकता है। पूर्व अमेरिकी राजनयिक डैनियल रसेल के साथ हुई बातचीत के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि आज हम ऐसी स्थिति में पहुंच चुके हैं जहां व्यापार समझौते को लेकर काफी हद तक सहमति की रूपरेखा तैयार हो चुकी है। उन्होंने रेखांकित किया कि भारत का आर्थिक ढांचा, जिसमें देश भर के करोड़ों छोटे उत्पादक, कृषि उत्पादक और कारखाने शामिल हैं, अमेरिका के औद्योगिक और आर्थिक ढांचे से काफी अलग है।
⏳ व्यापार वार्ताओं को पूरा करने के लिए जरूरी है धैर्य, जटिलताओं की वजह से तेज प्रगति की उम्मीदों की हुई परीक्षा
विदेश मंत्री ने अंत में यह भी जोड़ा कि इतने बड़े पैमाने पर व्यापार वार्ताओं (Trade Talks) को सफलतापर्वक पूरा करने के लिए अत्यधिक धैर्य और बारीकियों पर पैनी नजर रखने की आवश्यकता होती है। इसमें शामिल विभिन्न प्रकार की तकनीकी और संरचनात्मक जटिलताओं के कारण कई बार तेजी से प्रगति होने की उम्मीदों का भी कड़ा 'टेस्ट' हुआ है, जिसे दोनों देशों को आपसी समझ के साथ आगे बढ़ाना होगा।
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