मध्य प्रदेश नर्सिंग रजिस्ट्रेशन पोर्टल का बड़ा फर्जीवाड़ा, गधे और मंत्रियों के नाम से जारी हो गया सर्टिफिकेट
मध्य प्रदेश के नर्सिंग रजिस्ट्रेशन पोर्टल की लचर व्यवस्था का पर्दाफाश हुआ है, जहां फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आसानी से डिजिटल हस्ताक्षरयुक्त सर्टिफिकेट जारी हो रहे हैं।
मध्य प्रदेश में नर्सिंग रजिस्ट्रेशन की ऑनलाइन प्रणाली की लचर व्यवस्था इन दिनों प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था और मरीजों की जान के साथ बड़ा खिलवाड़ करती हुई साफ नजर आ रही है। राज्य में स्थिति इतनी बदतर है कि पोर्टल पर महज दो फर्जी दस्तावेज अपलोड करके किसी के भी नाम से वैध नर्सिंग सर्टिफिकेट आसानी से हासिल किया जा सकता है। इस खतरनाक लापरवाही और सिस्टम की पोल खोलने के लिए जब एक अनोखा स्टिंग किया गया, जिसमें गधे के नाम व फोटो के साथ-साथ प्रदेश के डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल और स्वास्थ्य पीएस सुखवीर सिंह के नाम से आवेदन सबमिट किया गया। इसके बाद जो हुआ उसने सबको हैरान कर दिया—पोर्टल ने बिना किसी जमीनी वेरिफिकेशन के तुरंत डिजिटल हस्ताक्षर युक्त आधिकारिक रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी कर दिया।
🛡️ नर्सिंग काउंसिल ने दी सफाई, छात्र संगठनों ने सभी डिजिटल रजिस्ट्रेशन की उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई
मामले के तूल पकड़ने और सोशल मीडिया पर खूब किरकिरी होने के बाद नर्सिंग काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉ. उपेन्द्र थोटे ने अपना बचाव करते हुए सफाई दी कि “यह सर्टिफिकेट केवल प्रोविजनल है और काउंसिल स्तर पर इसके भौतिक सत्यापन में 45 दिन से 3 महीने तक का समय लगता है।” वहीं, काउंसिल अध्यक्ष डॉ. वीनू कुशवाहा ने कहा कि “फर्जी दस्तावेज या गलत फोटो पाए जाने पर 7 से 15 दिनों के भीतर रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया जाएगा।” दूसरी तरफ, प्रदेश के विभिन्न छात्र संगठनों ने इस पूरे घटनाक्रम को नर्सिंग शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र का एक बहुत बड़ा घोटाला करार दिया है। उन्होंने मांग की है कि अब तक इस ऑनलाइन पोर्टल के जरिए जितने भी डिजिटल रजिस्ट्रेशन जारी किए गए हैं और जहां-जहां उनका उपयोग हुआ है, उसकी निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की जाए।
⚠️ जांच प्रणाली पूरी तरह ठप, एमपी ऑनलाइन का सॉफ्टवेयर केवल साइज परखता है सत्यता नहीं
नर्सिंग काउंसिल द्वारा लागू की गई नई ऑनलाइन व्यवस्था के कारण कॉलेजों की निगरानी भूमिका को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है। पुरानी और सुरक्षित प्रक्रिया के तहत कॉलेज प्राचार्य 10वीं-12वीं की अंकसूची, नर्सिंग कोर्स की मार्कशीट और ट्रेनिंग कम्प्लीशन सर्टिफिकेट की गहनता से भौतिक जांच करने के बाद ही आवेदन आगे बढ़ाते थे। लेकिन वर्तमान व्यवस्था में अभ्यर्थी सीधे पोर्टल पर कोई भी फर्जी दस्तावेज अपलोड करके तुरंत सर्टिफिकेट प्राप्त कर रहे हैं। एमपी ऑनलाइन का सॉफ्टवेयर केवल फाइल के आकार (साइज) और फॉर्मेट को ही परखता है, लेकिन दस्तावेजों की असलियत और सत्यता को पकड़ने में पूरी तरह असमर्थ है।
📄 प्रोविजनल का जिक्र नहीं होने से सरकारी भर्तियों और अस्पतालों में हो सकता है बड़ा दुरुपयोग
काउंसिल भले ही इस सर्टिफिकेट को प्रोविजनल बता रही हो, लेकिन सबसे गंभीर बात यह है कि जारी किए गए डिजिटल सर्टिफिकेट में कहीं भी 'प्रोविजनल' (Provisional) शब्द अंकित नहीं है। यही कारण है कि इसका बेखौफ दुरुपयोग सरकारी नौकरियों की भर्तियों, उच्च शिक्षा के दाखिलों और अस्पतालों की मान्यता प्रक्रिया में आसानी से किया जा सकता है, जो भविष्य में एक बड़ा खतरा बन सकता है।
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