वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में जल्द आएंगे चीते, नौरादेही में भोपाल के वनविहार के बराबर बना बड़ा बाड़ा
सागर के नौरादेही टाइगर रिजर्व में चीतों को बसाने की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। यहां बाघों के साथ चीते भी खुले जंगल में नजर आएंगे।
मध्य प्रदेश के सबसे बड़े टाइगर रिजर्व यानी वीरांगना रानी दुर्गावती (नौरादेही) टाइगर रिजर्व में अब बाघों के साथ-साथ चीते भी नजर आने वाले हैं। चीतों के इस नए आशियाने के लिए सभी प्रशासनिक और ढांचागत तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। खास बात यह है कि यहां चीतों को रखने के लिए 439 हेक्टेयर में एक बहुत बड़ा एनक्लोजर (बाड़ा/एसआरबी) तैयार किया गया है, जिसका क्षेत्रफल लगभग राजधानी भोपाल के 458 हेक्टेयर वाले वनविहार राष्ट्रीय उद्यान के बराबर है।
🌳 एसआरबी और क्वारंटाइन बोमा तैयार: कूनो और गांधीसागर के बाद नौरादेही बनेगा प्रदेश का तीसरा चीता रिजर्व
टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर रजनीश कुमार सिंह ने जानकारी दी कि पिछले साल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस बाड़े का भूमिपूजन किया था। अफ्रीकी भाषा के शब्द 'बोमा' (जिसे भारत में बाड़ा कहा जाता है) के तहत यहां 5 खंडों वाला एसआरबी और क्वारंटाइन बोमा तैयार किया गया है। सरकार की पॉलिसी के अनुसार किसी भी वन्यजीव को विदेश से आने पर आइसोलेशन में रखने के लिए यह विशेष व्यवस्था की जाती है। कूनो और गांधीसागर के विपरीत, नौरादेही देश की पहली ऐसी जगह होगी जहाँ चीते खुले जंगल में बाघों के साथ सह-अस्तित्व में रहेंगे।
📡 एनटीसीए से मिल चुकी है अनुमति: मुख्यमंत्री के दौरे के बाद तय होगी चीतों की शिफ्टिंग की तारीख
चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन समीता राजौरा ने बताया कि एनटीसीए के चीता प्रोजेक्ट के तहत नौरादेही में चीता शिफ्ट करने की हरी झंडी मिल चुकी है। पहले चरण में कूनो से एक नर और एक मादा चीता को यहां लाया जाएगा। हालांकि, मुख्यमंत्री के अंतिम कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा का इंतजार किया जा रहा है, जिसके बाद ही चीतों को नौरादेही लाए जाने की सटीक तारीख स्पष्ट हो सकेगी। इस दीर्घकालिक प्रोजेक्ट से बुंदेलखंड क्षेत्र में पर्यटन और रोजगार के नए अवसर मिलने की भी पूरी उम्मीद है।
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