एक मिनट के लिए भी बंद नहीं होती कड़ाही, भुख्खड़ बडी के वीडियो ने रातों-रात ऐसे चमकाई महिला की तकदीर
गुना की ममता यादव की 'मां के हाथ की कचौरी' सोशल मीडिया वीडियो वायरल होने के बाद मशहूर हो गई है। अब उनकी दुकान पर ग्राहकों की भारी भीड़ लग रही है।
भारत के कोने-कोने में जायके और स्वाद की कोई कमी नहीं है, लेकिन कई बार कुछ छोटी दुकानें अपनी मेहनत और अनोखे स्वाद के दम पर खास पहचान बना लेती हैं। मध्य प्रदेश के गुना जिले में रहने वाली ममता यादव की 'मां के हाथ की कचौरी' की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। एक समय था जब इस छोटी सी दुकान पर गिने-चुने ग्राहक ही आते थे, लेकिन सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर 'भुख्खड़ बडी' द्वारा बनाई गई एक वीडियो ने इस महिला की पूरी जिंदगी ही बदल दी और आज उनकी दुकान पर सुबह से रात तक ग्राहकों का तांता लगा रहता है।
👩🍳 पति के निधन के बाद संभाली थी जिम्मेदारी: खाटू श्याम यात्रा से आया था कचौरी की दुकान खोलने का शानदार आइडिया
ममता यादव ने साल 2023 में यह दुकान शुरू की थी। इससे पहले वह टिफिन सेंटर चलाती थीं, लेकिन पति के निधन के बाद उन्हें वह काम बंद करना पड़ा। ममता बताती हैं कि उन्हें कचौरी की दुकान खोलने का विचार खाटू श्याम जी की यात्रा के दौरान आया था। पहले इस दुकान का नाम 'प्रेम टी' था, जिसे बाद में बेटे के सुझाव पर बदलकर 'मां के हाथ की कचौरी' कर दिया गया। वह साफ-सफाई, शुद्ध तेल, घर के बने मसालों और बेसन-मैदा की गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखती हैं, जिससे उनकी कढ़ी-कचौरी का स्वाद ग्राहकों को खूब भाता है।
📈 एक दिन में बिक जाती हैं 1,000 कचौड़ियां: बड़ी कड़ाही भी पड़ने लगी छोटी, अब रख लिए हैं हेल्पर्स
सोशल मीडिया पर वीडियो आने के बाद ममता यादव की दुकान पर ऐसा बदलाव आया कि अब वह रोजाना करीब 1,000 कचौड़ियां बेच लेती हैं। स्थिति यह है कि उन्होंने मांग पूरी करने के लिए अब बड़ी कड़ाही खरीद ली है और सहायकों (हेल्पर्स) को भी रख लिया है। मात्र 20 रुपये प्रति प्लेट मिलने वाली इस कढ़ी-कचौरी के साथ प्याज, हरी मिर्च और चाय का जायका लेने दूर-दूर से लोग पहुँच रहे हैं। ममता इस सफलता का पूरा श्रेय उस सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर को देती हैं, जिनकी वजह से उनकी मेहनत को देश भर में पहचान मिली।
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