समंदर के पानी को पीने योग्य बनाने के साथ ग्रीन हाइड्रोजन बनाएगा चीन, बिजली की खपत में भी होगा बड़ा सुधार

चीन ने समुद्र के पानी से हाइड्रोजन, ताजा पानी और यूरेनियम निकालने की नई तकनीक विकसित की है। इस सिस्टम से बिजली की दक्षता में करीब 15 प्रतिशत सुधार हुआ है।

Oct 05, 2026 - 19:59
0
समंदर के पानी को पीने योग्य बनाने के साथ ग्रीन हाइड्रोजन बनाएगा चीन, बिजली की खपत में भी होगा बड़ा सुधार

चीन ने समुद्री पानी के इस्तेमाल को लेकर एक बहुत बड़ी सफलता हासिल करते हुए ऐसा अत्याधुनिक सिस्टम तैयार कर लिया है, जो समंदर के पानी से एक साथ हाइड्रोजन, ताजा पानी और यूरेनियम सहित कई महत्वपूर्ण खनिज संसाधन निकालने में सक्षम है। 'नेचर एनर्जी' जर्नल में प्रकाशित इस स्टडी के अनुसार, चीनी एकेडमी ऑफ साइंसेज के डालियान इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल फिजिक्स के वैज्ञानिकों ने इस तकनीक को विकसित किया है। इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें हाइड्रोजन बनाने के दौरान पैदा होने वाली बेकार गर्मी (वेस्ट हीट) को व्यर्थ जाने के बजाय दोबारा इस्तेमाल किया जाता है, जिससे बिजली की कार्यक्षमता में करीब 15 प्रतिशत तक का सुधार दर्ज किया गया है।

🔬 इलेक्ट्रोलाइजर और डिसेलिनेशन को जोड़ा: बेकार गर्मी का इस्तेमाल कर ऐसे तैयार होता है शुद्ध पानी

पारंपरिक रूप से सीधे समुद्री पानी से इलेक्ट्रोलिसिस के जरिए हाइड्रोजन बनाना बेहद मुश्किल होता है क्योंकि इसमें मौजूद क्लोराइड आयन और मिनरल्स इलेक्ट्रोड को नुकसान पहुँचाते हैं। इसके लिए पहले डिसेलिनेशन द्वारा नमक अलग करना पड़ता है, जिसमें काफी बिजली खर्च होती है। चीनी वैज्ञानिकों ने इस समस्या का समाधान निकालते हुए इलेक्ट्रोलाइजर और डिसेलिनेशन को एक साथ जोड़ दिया है। प्रक्रिया के दौरान निकलने वाली 80-90 डिग्री सेल्सियस की वेस्ट हीट को वैक्यूम डिस्टिलेशन टॉवर में भेजा जाता है, जहाँ कम तापमान पर पानी को भाप बनाकर ताजा पानी तैयार किया जाता है, जिसका उपयोग इलेक्ट्रोलाइजर चलाने में भी किया जाता है।

⚡ सालाना 3.8 लाख क्यूबिक मीटर हाइड्रोजन का उत्पादन: यूरेनियम और ब्रोमीन जैसे खनिज निकालने की भी है तैयारी

शोधकर्ताओं के अनुसार, 250 किलोवाट क्षमता का यह नया प्लांट हर साल लगभग 3.8 लाख स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर हाइड्रोजन (99.9999% शुद्धता) और करीब 256 टन ताजा पानी बना सकता है। इसके अलावा, डिसेलिनेशन के बाद बचे गाढ़े समुद्री पानी से यूरेनियम, ब्रोमीन और अन्य कीमती संसाधन भी अलग किए जा रहे हैं। समुद्र में यूरेनियम की प्रचुर मात्रा होने के कारण यह तकनीक भविष्य में परमाणु ऊर्जा और हरित ईंधन के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम साबित हो सकती है, जिससे कम लागत में ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन संभव हो सकेगा।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User