खैबर पख्तूनख्वा से शुरू हुआ पीटीआई का मार्च, कई जिलों में धारा 144 लागू और राजनीतिक टकराव तेज
पाकिस्तान में इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर पीटीआई का इस्लामाबाद मार्च शुरू हो गया है। सुरक्षा और आतंकियों की एंट्री की आशंका के बीच सरकार और पार्टी में टकराव बढ़ गया है।
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पीटीआई संस्थापक इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) का इस्लामाबाद मार्च अब देश में सबसे बड़ा राजनीतिक टकराव बन गया है। खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी की अगुवाई में शुरू हुआ यह मार्च अब करक जिले तक पहुंच चुका है और लगातार राजधानी इस्लामाबाद की ओर बढ़ने की तैयारी में है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के बीच सुरक्षा एजेंसियों और सरकार की ओर से यह आशंका जताई गई है कि प्रदर्शनकारियों की भीड़ की आड़ में आतंकियों को सुरक्षा घेरे और चेकपोस्ट पार कराकर आगे बढ़ाया जा सकता है, जिससे हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं।
🔍 आतंकियों की एंट्री की आशंका और सरकार की चेतावनी: क्या वाकई किसी बड़े खतरे से डर रही है पाकिस्तान सरकार?
मार्च के शुरू होते ही पाकिस्तान की राजनीति में एक नई बहस छिड़ गई है। राष्ट्रपति केपी गवर्नर हाउस और गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने प्रांत की बिगड़ती कानून-व्यवस्था और पीटीआई के इस लंबे मार्च पर गहरी चिंता जताई है। सरकार की तरफ से यह आशंका जताई गई कि मार्च के दौरान आतंकियों को सुरक्षा चेकपोस्ट पार कराने की कोशिश हो सकती है, हालांकि इस बात का कोई स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं आया है। केंद्र सरकार ने साफ चेतावनी दी है कि प्रदर्शनकारियों को इस्लामाबाद में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी, जिसके बाद खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन या आपातकाल लगाने जैसे विकल्पों पर भी चर्चा तेज हो गई है।
⚖️ कई जिलों में धारा 144 लागू और हाई अलर्ट: पुलिस लाइन में बुलाए गए कर्मी, आर-पार के मूड में पीटीआई
सुरक्षा की स्थिति को देखते हुए खैबर पख्तूनख्वा पुलिस को पूरी तरह से हाई अलर्ट पर रखा गया है। डीआई खान, टैंक, हांगू और दक्षिण वजीरिस्तान सहित कई जिलों में धारा 144 लागू कर दी गई है, जिससे लोगों और वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है। विभिन्न जिलों से गैर-जरूरी पुलिसकर्मियों को वापस बुलाकर रिजर्व में रखा गया है। दूसरी तरफ, पीटीआई नेतृत्व अपने रुख पर कायम है और पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह मार्च कानून और संविधान की सर्वोच्चता की लड़ाई है, जिसे हर हाल में आगे बढ़ाया जाएगा।
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