किसान कलाकार योगेंद्र पाल सिंह ने अनाज और बीजों से बनाई पायलट कैप्टन स्मित मच्छार की अनूठी कलाकृति

नर्मदापुरम के किसान कलाकार योगेंद्र पाल सिंह सोलंकी ने विभिन्न अनाजों और बीजों के दानों से भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार की अनूठी कलाकृति तैयार की है।

Oct 06, 2026 - 16:05
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किसान कलाकार योगेंद्र पाल सिंह ने अनाज और बीजों से बनाई पायलट कैप्टन स्मित मच्छार की अनूठी कलाकृति

मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले में एक अनूठी कला का नजारा देखने को मिला है, जहाँ साहसी भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार के प्रति अपनी कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त करते हुए एक किसान कलाकार ने अद्भुत कलाकृति बनाई है। ग्राम सुपरली निवासी और पेशे से किसान योगेंद्र पाल सिंह सोलंकी ने विभिन्न प्रकार के अनाजों और बीजों के दानों का उपयोग करके भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार का भव्य पोट्रेट तैयार किया है। कलाकार का कहना है कि देश के वीर सपूत और पायलट के सम्मान में इस प्रकार की कलाकृति तैयार करना उनके लिए बेहद गौरव का विषय है।

🎨 धान, बाजरा, तिल और मक्के के दानों से बनाई पेंटिंग: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से मिली हनुमान चालीसा वाले प्रसंग की सीख

योगेंद्र पाल सिंह सोलंकी ने जानकारी देते हुए बताया कि इस कलाकृति को तैयार करने में धान, चावल, तिल, खसखस, बाजरा, अलसी और मक्का जैसे विभिन्न अनाजों एवं बीजों का उपयोग किया गया है। चूंकि भारत एक कृषि प्रधान देश है और अनाज यहाँ के किसानों व संस्कृति का मुख्य आधार है, इसलिए उन्होंने भारतीय पायलट के अदम्य साहस को देश के अन्न के साथ जोड़ते हुए यह अनूठी कृति गढ़ी है। उन्हें यह प्रेरणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस बातचीत से मिली, जिसमें कैप्टन स्मित मच्छार ने हमले के दौरान हनुमान चालीसा के पाठ का जिक्र किया था। इसी प्रसंग से प्रेरित होकर उन्होंने भगवान हनुमान के स्वरूप के साथ कैप्टन स्मित मच्छार की पेंटिंग बनाई है।

🚀 कैप्टन तक कलाकृति पहुँचाने का है प्रयास: विशुद्ध रूप से भावनात्मक जुड़ाव और सम्मान का है अनूठा प्रतीक

किसान कलाकार योगेंद्र पाल सिंह ने स्पष्ट किया कि इस पहल के पीछे उनका कोई व्यावसायिक उद्देश्य नहीं है, बल्कि यह एक भारतीय किसान की ओर से देश के वीर पायलट के प्रति गहरा सम्मान और हौसला बढ़ाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि उनका यह प्रयास है कि देश के विभिन्न फ्लाइंग क्लबों, विमानन संस्थाओं और संगठनों से संपर्क साधकर किसी उपयुक्त माध्यम से इस कलाकृति को सीधे कैप्टन स्मित मच्छार तक पहुँचाया जाए। अनाज के दानों से बनी यह कलाकृति भारतीय कृषि परंपरा और देश के साहसी विमानन कर्मियों के बीच एक अनूठा भावनात्मक सेतु साबित होगी।

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