जम्बूपानी गांव के सरकारी स्कूल में गिरा भारी-भरकम लोहे का गेट, पहली कक्षा की 6 वर्षीय मासूम गंभीर रूप से घायल

बुरहानपुर जिले के जम्बूपानी गांव स्थित सरकारी स्कूल में लोहे का गेट गिरने से 6 साल की छात्रा गंभीर रूप से घायल हो गई है। ग्रामीणों ने पहले ही जर्जर गेट की शिकायत की थी।

Oct 06, 2026 - 16:22
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जम्बूपानी गांव के सरकारी स्कूल में गिरा भारी-भरकम लोहे का गेट, पहली कक्षा की 6 वर्षीय मासूम गंभीर रूप से घायल

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिला मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर दूर एक सरकारी स्कूल से लापरवाही की हैरान कर देने वाली तस्वीर सामने आई है। आदिवासी बहुल जम्बूपानी गांव स्थित शासकीय प्राथमिक स्कूल में अचानक एक भारी-भरकम लोहे का मुख्य गेट đổकर गिर गया, जिसकी चपेट में आकर पहली कक्षा की 6 वर्षीय मासूम छात्रा गंभीर रूप से दब गई। इस अचानक हुए हादसे के बाद स्कूल परिसर में हड़कंप मच गया और चारों तरफ चीख-पुकार मच गई। आनन-फानन में स्थानीय लोगों की मदद से बच्ची को मलबे से बाहर निकाला गया और परिजन उसे लेकर जिला अस्पताल पहुँचे, जहाँ चाइल्ड वार्ड में उसका इलाज जारी है।

⚠️️ ग्रामीणों की चेतावनी को किया गया नजरअंदाज: जर्जर गेट की मरम्मत न होने से हुआ हादसा, अस्पताल में भी दिखी व्यवस्था की कमी

मिली जानकारी के अनुसार, जम्बूपानी गांव के इस स्कूल परिसर में ही ग्राम पंचायत भी संचालित होती है। मुख्य द्वार पर लगे लोहे के इस गेट की कॉलम से पकड़ काफी समय से कमजोर हो चुकी थी, जिसकी शिकायत ग्रामीणों ने कई बार जिम्मेदार अधिकारियों से की थी, लेकिन हर बार इसे नजरअंदाज कर दिया गया। सोमवार को जब बच्ची स्कूल पहुँची, तो जर्जर गेट उसके ऊपर आ गिरा, जिससे उसके चेहरे और पेट में गंभीर चोटें आई हैं। हद तो तब हो गई जब घायल मासूम को जिला अस्पताल ले जाने पर समय पर स्ट्रेचर नहीं मिला, और बेबस पिता को अपनी बच्ची को गोद में उठाकर वार्डों के चक्कर काटने पड़े।

🔍 प्रशासनिक जांच के आदेश: जनजातीय विभाग के सहायक आयुक्त और सिविल सर्जन ने कही दोषियों पर सख्त कार्रवाई की बात

इस गंभीर मामले के सामने आने के बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है। जनजातीय कार्य विभाग के सहायक आयुक्त भरत जांचपुरे ने पूरे घटनाक्रम पर दुख जताते हुए निष्पक्ष जाँच की बात कही है और स्पष्ट किया है कि लापरवाही बरतने वाले दोषियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं, जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. दर्पण टोके का कहना है कि अस्पताल में संसाधनों की कमी नहीं है, लेकिन इस बात की भी जाँच कराई जाएगी कि स्ट्रेचर मिलने में देरी क्यों हुई। बहरहाल, इस घटना के बाद से स्कूल प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

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