बहरी क्षेत्र में गहराया भूमि विवाद, ग्रामीणों, वन विभाग और राजस्व के दावों के बीच अटके 12 परिवारों के पीएम आवास

सीधी के बहरी क्षेत्र में भूमि विवाद के कारण 40 परिवार प्रभावित हो रहे हैं और 12 प्रधानमंत्री आवास अटक गए हैं। जमीन पर ग्रामीण, वन विभाग और राजस्व अपना दावा कर रहे हैं।

Oct 06, 2026 - 16:24
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बहरी क्षेत्र में गहराया भूमि विवाद, ग्रामीणों, वन विभाग और राजस्व के दावों के बीच अटके 12 परिवारों के पीएम आवास

मध्य प्रदेश के सीधी जिले के बहरी क्षेत्र में जमीन का मालिकाना हक को लेकर एक पेचीदा विवाद खड़ा हो गया है। एक ही भूमि के टुकड़े पर स्थानीय ग्रामीणों, गांव के ही बैजनाथ द्विवेदी, वन विभाग और राजस्व विभाग—चारों पक्ष अपने-अपने दावे ठोक रहे हैं। इस प्रशासनिक और कानूनी पेचीदगी के चलते यहाँ रहने वाले 12 गरीब परिवारों के प्रधानमंत्री आवास योजना के मकानों का निर्माण कार्य बीच में ही अटक गया है। आरोप है कि बैजनाथ द्विवेदी ने जमीन पर अपना अधिकार जताते हुए बहरी तहसीलदार न्यायालय से स्टे (स्थगन आदेश) ले लिया है, जिससे वर्षों से यहाँ आबाद परिवारों के सिर पर बेघर होने का बड़ा संकट मंडराने लगा है।

📜 'अजीत जोगी के कार्यकाल में मिले थे पट्टे': 100 साल से रहने का दावा कर रहे ग्रामीण, सरपंच ने लगाए गंभीर आरोप

गाँव के रामसखा कोल ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि उनके जैसे 40 से अधिक परिवार इस भूमि विवाद की वजह से बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। उनके साथ आए दिन गाली-गलौज और मारपीट की जाती है तथा उनके घर तोड़ने की कोशिशें भी की जाती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे इस स्थान पर पिछले 100 साल से अधिक समय से निवास कर रहे हैं। पहले यहाँ घना जंगल हुआ करता था, और तत्कालीन सीधी कलेक्टर अजीत जोगी के कार्यकाल में उनके पूर्वजों को यहाँ रहने के कानूनी पट्टे भी बांटे गए थे। वहीं, ग्राम सरपंच राजेश साकेत का आरोप है कि मूल रूप से बैजनाथ द्विवेदी के नाम पर करीब 20 एकड़ जमीन थी, लेकिन अब कागजों में 250 एकड़ से अधिक जमीन होने का दावा किया जा रहा है, जबकि कई हिस्से पूर्व में एमपी शासन के नाम दर्ज थे। 85 वर्षीय बुजुर्ग भागीरथी साकेत ने नम आँखों से कहा कि उनका जन्म इसी मिट्टी में हुआ और अब बुढ़ापे में उन्हें बेघर होने का डर सता रहा है।

🔍 वन विभाग और राजस्व विभाग आमने-सामने: रेंजर और तहसीलदार ने दिए अपने बयान, चल रही है मामले की जांच

इस पूरे मामले पर बहरी रेंज की रेंजर कविता साकेत का कहना है कि संबंधित विवादित जमीन वन विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड में जंगल के रूप में दर्ज है और उनके खसरे के अंतर्गत आती है। दूसरी ओर, बहरी के तहसीलदार हिमांशु शुक्ला ने इसे राजस्व विभाग की लगभग 15 एकड़ भूमि बताते हुए कहा कि यह पहले मध्य प्रदेश शासन के नाम पर दर्ज थी, जो बाद फिलहाल बैजनाथ द्विवेदी के नाम पर है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता से जाँच की जा रही है। बहरहाल, बड़ा सवाल यह बना हुआ है कि आखिर एक ही जमीन पर ग्रामीण, वन विभाग, राजस्व और निजी व्यक्ति के अलग-अलग दावे का सच क्या है और इसका क्या समाधान निकलेगा।

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