मुस्लिम त्योहार कमेटी की अपील, रील और व्यूज के चक्कर में गरबा जैसे धार्मिक आयोजनों से दूर रहें मुस्लिम युवा

मध्य प्रदेश मुस्लिम त्योहार कमेटी ने युवाओं से अपील की है कि वे रील और लाइक्स के चक्कर में गरबा जैसे धार्मिक आयोजनों से दूर रहें और सामाजिक सौहार्द बनाए रखें।

Oct 06, 2026 - 16:27
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मुस्लिम त्योहार कमेटी की अपील, रील और व्यूज के चक्कर में गरबा जैसे धार्मिक आयोजनों से दूर रहें मुस्लिम युवा

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से शारदीय नवरात्रि और गरबा आयोजनों को लेकर एक अहम खबर सामने आई है। हिंदू धर्म के सबसे बड़े त्योहारों में से एक शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू होने जा रही है, जिसके तहत जगह-जगह गरबा और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इसे देखते हुए ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी ने मुस्लिम विद्यार्थियों और युवाओं से पूरी तरह जिम्मेदार, संयमित और अनुशासित व्यवहार करने की अपील की है। कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शमशुल हसन ने विशेष रूप से युवाओं से आग्रह किया है कि वे केवल सोशल मीडिया पर रील बनाने, लाइक्स और व्यूज बटोरने के चक्कर में किसी भी धार्मिक आयोजन में अनावश्यक रूप से शामिल होने से बचें।

📜 शासन-प्रशासन को लिखा गया पत्र: शिक्षण संस्थानों और छात्रावासों तक संदेश पहुँचाने की मांग, सामाजिक सौहार्द बनाए रखने पर जोर

मुस्लिम त्योहार कमेटी ने इस संबंध में शासन-प्रशासन को पत्र भेजकर जरूरी कदम उठाने का अनुरोध किया है। कमेटी ने मांग की है कि नवरात्रि शुरू होने से पहले यह जागरूकता संदेश विश्वविद्यालयों, कॉलेजों, तकनीकी संस्थानों, मेडिकल कॉलेजों और हॉस्टल तक पहुँचाया जाए, ताकि छात्र समय रहते सतर्क रहें। कमेटी का कहना है कि हर युवा को अन्य धर्मों की आस्था और परंपराओं का पूरा सम्मान करना चाहिए तथा स्थानीय कानूनों का पालन करते हुए किसी भी प्रकार के विवाद या उकसावे से दूर रहना चाहिए, जिससे समाज का शांतिपूर्ण माहौल प्रभावित न हो।

✨ 'हमारा उद्देश्य किसी धार्मिक आयोजन का विरोध करना नहीं': कमेटी बोली— अमन और भाईचारा कायम रखने के लिए प्रशासन का पूरा सहयोग करेंगे

कचहरी और प्रशासनिक स्तर पर अपनी बात रखते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष शमशुल हसन ने स्पष्ट किया कि जब दूसरा समुदाय यह संकेत दे रहा है कि उनके आयोजनों से दूरी रखी जाए, तो इसे विवाद का मुद्दा नहीं बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारा मकसद किसी भी धार्मिक आयोजन या परंपरा का विरोध करना बिल्कुल नहीं है, बल्कि युवाओं को गैर-जिम्मेदाराना हरकतों से रोकना है। कमेटी ने यह भी घोषणा की है कि प्रदेशभर के जिला और स्थानीय स्तर के पदाधिकारी उलेमाओं, सामाजिक संगठनों और जिला प्रशासन के साथ मिलकर शांति और भाईचारा बनाए रखने के लिए सकारात्मक भूमिका निभाएंगे।

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