मंडी प्रशासन कह रहा सीजन समाप्ति की बात, किसान बोले—समय पर गाड़ियां न आने से हो रहा भारी नुकसान

मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले में केला उत्पादक किसान परेशान हैं। खेतों में फसल तैयार होने के बावजूद व्यापारी केला काटने नहीं आ रहे हैं, जिससे फसल सड़ने लगी है।

Oct 06, 2026 - 18:41
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मंडी प्रशासन कह रहा सीजन समाप्ति की बात, किसान बोले—समय पर गाड़ियां न आने से हो रहा भारी नुकसान

अपनी खास मिठास के लिए देश-दुनिया में मशहूर मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले में केला उत्पादक किसान इन दिनों गंभीर संकट से जूझ रहे हैं। समूचे प्रदेश में केले के सर्वाधिक उत्पादन वाले इस जिले में पिछली बार प्राकृतिक आपदा से किसानों को भारी नुकसान हुआ था, जिसका मुआवजा तो मिल गया, लेकिन अब किसानों के सामने एक नई और अजीब परेशानी खड़ी हो गई है। अधिकांश किसानों के खेतों में केला पूरी तरह तैयार हो चुका है, लेकिन व्यापारी उनके खेतों तक केला काटने के लिए नहीं पहुंच रहे हैं, जिसके कारण कई जगहों पर केला पौधों पर ही पककर सड़ने लगा है।

🚚 मंडी में रोजाना 80 से 100 गाड़ियों की आवक का दावा, लेकिन कई किसानों को करना पड़ रहा लंबा इंतजार

किसानों का आरोप है कि केला नीलामी सभागृह से भले ही रोजाना 80 से 100 गाड़ियों की आवक दर्शाई जा रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि कई किसानों के खेतों तक गाड़ियां नहीं पहुंच पा रही हैं। बुरहानपुर क्षेत्र के लोनी, बिरोदा, पातोंडा, भोलाना और शाहपुर तहसील के भावसा, चौंडी, मोहद समेत कई गांवों के किसानों की फसल खेतों में तैयार खड़ी है, लेकिन व्यापारियों की उदासीनता और मंडी प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि व्यापारियों द्वारा खराब सड़कों और दूरी का बहाना बनाकर खेतों से माल नहीं उठाया जा रहा है।

💰 एक साल की मेहनत पर फिर रहा पानी: लागत निकलने की चिंता में डूबे किसान, सरकार से लगाई मदद की गुहार

किसान विजय बाविस्कर और ओमराज पुंडलिक ने बताया कि केले की एक फसल को तैयार करने में 12 से 14 महीने की कड़ी मेहनत लगती है, जिसमें खाद, दवाई, सिंचाई और मजदूरी पर भारी खर्च होता है। अब जब फसल कटाई का समय आया है, तो समय पर बिक्री न होने से केला खेतों में ही पककर खराब हो रहा है, जिससे उसकी क्वालिटी और बाजार मूल्य दोनों गिर रहे हैं। दूसरी ओर, रेणुका माता मंडी स्थित केला नीलामी केंद्र के प्रभारी जगदीश चौधरी का कहना है कि केला सीजन अब समाप्ति की ओर है और जिन खेतों में अधिक माल है, वहां से व्यापारी केला काट रहे हैं, लेकिन किसानों का गुस्सा और चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।

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