सागर-दमोह मार्ग पर झलोन का टूटा पुल बना मुसीबत, 14 महीने बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं
दमोह जिले में व्यारमा नदी पर झलोन का टूटा हुआ पुल 14 महीने बाद भी नहीं बन पाया है। 41 करोड़ स्वीकृत होने के बाद भी काम रुका होने से 18 गांवों के लोग परेशान हैं।
सागर और दमोह जिले की सीमा को आपस में जोड़ने वाला झलोन का क्षतिग्रस्त पुल स्थानीय ग्रामीणों और सैलानियों के लिए बड़ी मुसीबत बन चुका है। व्यारमा नदी पर बना यह पुल 31 जुलाई 2025 को हुई भारी बारिश के दौरान टूट गया था, जिसे बीते हुए 14 महीने से अधिक का समय बीत चुका है। हालांकि इसी साल जुलाई में कैबिनेट की बैठक में इस नए पुल के निर्माण के लिए 41 करोड़ 43 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी, लेकिन बारिश के बाद भी धरातल पर काम शुरू न होने से लोगों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं।
🚶♂️ डेढ़ दर्जन गांवों के 25 हजार से अधिक लोग प्रभावित, लंबा चक्कर लगाने को मजबूर
इस महत्वपूर्ण पुल के टूटने से झापन, लकलका, सूरादेही, कुदपुरा, बैरागढ़, टिपनी, औरियामाल, धनेटा ससना और नयाखेड़ा समेत करीब 18 गांवों के 25 हजार से अधिक ग्रामीण बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। मुख्य मार्ग बाधित होने के कारण ग्रामीणों को अब मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए लगभग 22 किलोमीटर लंबा चक्कर काटकर सफर करना पड़ रहा है। इसके अलावा, क्षेत्र के टाइगर रिजर्व में सैलानियों का आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है, जिससे स्थानीय व्यवसायियों और दुकानदारों की आजीविका पर भी गहरा संकट खड़ा हो गया है।
⚠️ स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर शादियों तक में आ रही है अड़चन
ग्रामीणों का कहना है कि पुल टूटा होने के कारण स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति में मरीजों को दमोह या तेंदूखेड़ा ले जाने में भारी कठिनाई होती है। स्थानीय निवासियों ने यह भी दर्द बयां किया कि परिवहन का साधन सुलभ न होने के कारण कई जगहों पर रिश्ते आने-जाने में भी रुकावटें आ रही हैं। एमपीआरडीसी के प्रबंधक डीएम तंतुवाय का इस संबंध में कहना है कि पुल निर्माण के लिए टेंडर मंगाए गए हैं, जो प्रक्रियाधीन हैं; टेंडर खुलने और ठेका फाइनल होने के तुरंत बाद निर्माण कार्य आरंभ करा दिया जाएगा।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)