वृद्धाश्रम में रह रहे बुजुर्गों का दर्द, अपनों से ठुकराए गए माता-पिता बोले- 'अब बच्चों के पास नहीं जाना'
देवास के बसेरा वृद्धाश्रम में रह रहे बुजुर्गों और उनकी अनदेखी करने वाले परिवारों की दिल दहला देने वाली दास्तां। पितृ पक्ष में अपनों की बेरुखी का सच।
श्राद्ध पक्ष के इन 15 दिनों में जहां एक तरफ लोग अपने पितरों को याद कर उनका तर्पण करते हैं, वहीं मध्य प्रदेश के देवास स्थित 'बसेरा वृद्धाश्रम' में कुछ ऐसी कहानियां मौजूद हैं जो समाज के रिश्तों की परतें उधेड़कर रख देती हैं। यहां रह रहीं उपमा बाई जैसे कई बुजुर्ग हैं, जो पथराई आंखों से यह भरोसा जताती हैं कि उन्हें जीते जी अपने बच्चों के पास नहीं जाना और न ही मरने के बाद उनके परिवार को अंतिम संस्कार के लिए बुलाना है। उनके लिए अब यही आश्रम और यहां के लोग ही उनका असली परिवार बन चुके हैं।
📸 एक दीवार पर टंगी 100 तस्वीरें और अपनों की बेरुखी की दास्तां
आश्रम की एक पूरी दीवार पर लगभग 100 ऐसे बुजुर्गों की तस्वीरें टंगी हैं, जो कभी अपने घर-परिवार से बेदखल होकर यहां आए थे और यहीं दुनिया से अलविदा कह गए। आश्रम के प्रबंधक दिनेश चौधरी बताते हैं कि 2001 से लेकर अब तक जितने भी वृद्धजनों का यहां निधन हुआ, उनमें से 95 प्रतिशत मामलों में परिजन अंतिम संस्कार तक में शामिल होने नहीं आए। कई बार फोन करने पर परिजनों ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि 'टाइम मैनेज नहीं हो रहा, आप ही वीडियो कॉल से मुखाग्नि दिखा दीजिए।' ऐसे मामलों में आश्रम ने ही उनके अंतिम संस्कार से लेकर पिंडदान और तर्पण तक की सभी परंपराएं पूरी की हैं।
🏡 25 वर्षों में 440 बुजुर्गों को मिला सहारा, कई ने यहीं बिताई आखिरी सांस
देवास के इस बसेरा वृद्धाश्रम ने पिछले 25 वर्षों में करीब 440 बुजुर्गों को आसरा दिया है। इनमें से कई लोगों को समझाइश देकर उनके परिवारों तक वापस भेजा गया, तो कुछ ऐसे भी रहे जिन्होंने जीवनभर यहीं रहने का फैसला किया। वर्तमान में भी लगभग 50 बुजुर्ग यहां रह रहे हैं, जिनकी पूरी दुनिया अब यही आश्रम है। प्रबंधक दिनेश चौधरी इन्हीं दिनों मृतक बुजुर्गों के पिंडदान के लिए गयाजी जा रहे हैं, ताकि दुनिया छोड़ चुके इन बुजुर्गों को भी यह तसल्ली रहे कि कोई उनका नामलेवा बाकी है।
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