UPI पर सरचार्ज के फैसले के विरोध में इंदौर के व्यापारी, लागू हुआ MDR शुल्क तो हटेंगे QR कोड
इंदौर में 125 व्यापारिक संगठनों ने 2000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान पर प्रस्तावित MDR सरचार्ज का विरोध करते हुए दुकानें से QR कोड हटाने का फैसला लिया है।
मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में व्यापारियों ने केंद्र सरकार द्वारा 2000 रुपये से अधिक के ऑनलाइन यूपीआई (UPI) भुगतान पर प्रस्तावित MDR सरचार्ज के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया है। अहिल्या चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज से जुड़े करीब 125 व्यापारिक संगठनों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि जिस दिन से बाजार में डिजिटल लेन-देन पर अतिरिक्त शुल्क लागू किया जाएगा, उसी दिन से सभी दुकानदार अपने प्रतिष्ठानों से क्यूआर (QR) कोड हटा लेंगे और व्यापार पूरी तरह कैश (नगद) में संचालित किया जाएगा।
🚫 व्यापार की लागत बढ़ाने वाला फैसला मंजूर नहीं, 'नो UPI डे' के बाद आंदोलन का अगला चरण
संगठन के अध्यक्ष रमेश खंडेलवाल और जॉइंट सेक्रेटरी अक्षय कुमार जैन ने स्पष्ट किया कि व्यापारी पहले से ही बढ़ती लागत, कड़ी प्रतिस्पर्धा और सीमित मुनाफे की चुनौतियों से जूझ रहे हैं। ऐसे में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ स्वीकार नहीं किया जाएगा। गौरतलब है कि 23 सितंबर को आयोजित 'नो UPI डे' के बाद अब इस आंदोलन को नया रूप दिया जा रहा है। व्यापारियों का कहना है कि जब अतिरिक्त लागत खुद उठानी पड़ेगी, तो वे ऐसे भुगतान माध्यम को क्यों अपनाएं जिस पर शुल्क देना पड़े।
📢 अगले 5 दिनों तक चलेगा बाजारों में जनसंपर्क अभियान, केवल नगद कारोबार पर सहमति
इस निर्णय को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए चेम्बर्स के पदाधिकारी अगले 5 दिनों तक इंदौर के विभिन्न प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों में जनसंपर्क अभियान चलाएंगे। व्यापारियों को प्रस्तावित सरचार्ज के दुष्परिणामों से अवगत कराते हुए लामबंद किया जाएगा। अभिनव कला समाज हॉल में हुई इस बैठक में गोपाल दास अग्रवाल, गोविंद अग्रवाल, नरेंद्र बाफना सहित अनेक गणमान्य व्यापारी प्रतिनिधि मौजूद रहे, जिन्होंने एक सुर में संकल्प जताया कि सरचार्ज लागू होने पर केवल नगद कारोबार का विकल्प ही अपनाया जाएगा।
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