राष्ट्रीय डाक दिवस विशेष, जानिए कैसे 132 साल पहले भारतीय डाक विभाग ने महिलाओं को दिया था बीमा का सुरक्षा कवच
राष्ट्रीय डाक दिवस पर जानिए भारतीय डाक विभाग का ऐतिहासिक फैसला। जब निजी कंपनियां महिलाओं को बीमा देने से कतराती थीं, तब पोस्ट ऑफिस ने 1894 में शुरू की थी PLI योजना।
भारत का पोस्ट ऑफिस हमेशा से देश का सबसे भरोसेमंद और अहम हिस्सा रहा है। राष्ट्रीय डाक दिवस के अवसर पर यह जानना बेहद दिलचस्प है कि पोस्ट ऑफिस ने न केवल लोगों तक चिट्ठियां और पार्सल पहुंचाए, बल्कि महिला सशक्तिकरण की एक ऐसी मिसाल पेश की जो इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई। आज से करीब 132 साल पहले, जब देश-विदेश की बड़ी-बड़ी बीमा कंपनियां महिलाओं के जीवन को वित्तीय जोखिम मानकर बीमा देने से सीधा मना कर देती थीं, तब भारतीय डाक विभाग ने आगे आकर महिलाओं के जीवन का मोल समझा और उन्हें जीवन बीमा से जोड़कर सुरक्षा का एक नया अध्याय लिखा।
📜 1884 में शुरू हुई थी PLI योजना, 1894 में महिलाओं को भी किया गया शामिल
भारत में ब्रिटिश शासनकाल के दौरान 1854 में भारतीय डाक विभाग की शुरुआत हुई थी। इसके बाद 19वीं सदी के अंत में, यानी 1884 में पोस्ट ऑफिस ने बीमा सेक्टर में कदम रखते हुए पोस्टल लाइफ इंश्योरेंस (PLI) की शुरुआत की। शुरुआती दौर में यह बीमा व्यवस्था केवल पुरुषों तक ही सीमित थी, क्योंकि उस समय की स्वदेशी और विदेशी बीमा कंपनियां उच्च मातृ मृत्यु दर, कम जीवन प्रत्याशा और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के चलते महिलाओं का बीमा करने से कतराती थीं। लेकिन ऐतिहासिक कदम उठाते हुए डाक विभाग ने 1894 में महिलाओं को भी इस बीमा सुरक्षा कवच के दायरे में शामिल कर लिया।
📈 बढ़ता जा रहा है लोगों का भरोसा, करोड़ों लोग ले रहे हैं योजनाओं का लाभ
आज देश का हर कोना पोस्टल लाइफ इंश्योरेंस से जुड़ चुका है। ग्वालियर के लश्कर प्रधान डाक घर के पोस्ट मास्टर मलखान सिंह लोधी बताते हैं कि पोस्ट ऑफिस की शुरुआत का उद्देश्य कभी आर्थिक लाभ कमाना नहीं, बल्कि आमजन को जोड़ना था। यही वजह है कि आज भी नागरिकों का भरोसा डाक विभाग पर लगातार बना हुआ है। वर्ष 1995 से ग्रामीण क्षेत्रों के लिए शुरू की गई ग्रामीण डाक जीवन बीमा योजना (RPLI) और अन्य आधुनिक पॉलिसियों के चलते आज करोड़ों लोग इससे जुड़कर अपने भविष्य को सुरक्षित कर रहे हैं।
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