बुरहानपुर के खामनी गांव में फिर सजी मां वैष्णो देवी धाम की गुफा, 51 शक्तिपीठों के होंगे दर्शन
बुरहानपुर के खामनी गांव में शारदीय नवरात्रि पर वैष्णो देवी धाम की तर्ज पर 3 किमी लंबी गुफा बनाई गई है, जहाँ भक्त 51 शक्तिपीठों के दर्शन कर सकेंगे।
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के खामनी गांव में शारदीय नवरात्रि का क्रेज इस बार कुछ अलग ही रंग में नजर आ रहा है। यहाँ के ग्रामीणों और युवाओं ने मिलकर एक बार फिर माता वैष्णो देवी धाम की तर्ज पर हूबहू गुफा का निर्माण किया है। इस भव्य गुफा के भीतर मां के दरबार के दर्शन, चरण पादुका और पवित्र बाणगंगा की बेहद मनमोहक झांकी तैयार की गई है। इस आयोजन की सबसे खास बात यह है कि भक्त यहां जम्मू-कश्मीर जाए बिना ही मां वैष्णो देवी के साथ-साथ देश के सभी 51 शक्तिपीठों के दर्शन का लाभ उठा सकेंगे। आयोजकों के अनुसार, हाल ही में कटरा से मां के स्वरूप की पिंडी और चरण पादुकाओं को पूरी विधि-विधान और सिद्ध करके लाया गया है।
🏘️ घरों की चार मंजिला छतों पर तैयार हुई 80 फीट ऊंची और 3 किमी लंबी अद्भुत गुफा
खामनी गांव के ग्रामीणों ने अपनी कला और एकता का परिचय देते हुए घरों की छतों को आपस में जोड़कर करीब 3 किलोमीटर लंबी और 80 फीट ऊंची यह गुफा तैयार की है। इसमें चार मंजिला मकानों की छतों का उपयोग किया गया है। सबसे अच्छी बात यह है कि छतों से होकर गुजरने वाली इस गुफा के कारण गांव का मुख्य सड़क यातायात पूरी तरह सुचारु बना हुआ है और केवल एक छोटे मार्ग को परिवर्तित किया गया है ताकि मंदिर के आसपास भीड़ न बढ़े। निर्माण के दौरान यदि किसी मकान की बाउंड्रीवॉल आड़े आई, तो ग्रामीणों ने आपसी सहमति से उसे भी हटा दिया। जिला प्रशासन के अधिकारियों ने भी इस स्थल का निरीक्षण कर सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों का जायजा लिया है।
💰 लगभग 65 लाख रुपये की लागत, इस साल 5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद
ट्रस्ट के अध्यक्ष योगेश मोतेकर और कार्यवाहक अध्यक्ष किशोर पाटिल ने बताया कि पिछले साल भी यहां लगभग 5 लाख भक्तों ने दर्शन किए थे, जिसे देखते हुए इस बार इस आयोजन को और अधिक भव्य बनाया गया है। इस पूरे प्रोजेक्ट को तैयार करने में 2 महीने का समय और लगभग 65 लाख रुपये की लागत आई है। आयोजकों का उद्देश्य उन श्रद्धालुओं को वैष्णो देवी के दर्शन का अनुभव कराना है जो आर्थिक तंगी या अन्य कारणों से 1800 किलोमीटर दूर कटरा जाने में असमर्थ हैं। कटरा में जहां 14 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी पड़ती है, वहीं खामनी गांव में मात्र 3 किलोमीटर की यात्रा में भक्त माता के दर्शन कर पाएंगे।
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