बदहाली के आंसुओं में डूबा इंदौर का ऐतिहासिक फाइन आर्ट कॉलेज, क्लासरूम में घूम रहे कुत्ते और चूहे

इंदौर के ऐतिहासिक गवर्नमेंट इंस्टिट्यूट ऑफ फाइन आर्ट की स्थिति बदहाल हो गई है। किराए की जर्जर इमारत में चल रही क्लास के बीच कुत्ते और जीव-जंतु डेरा डाले रहते हैं।

Oct 10, 2026 - 19:01
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बदहाली के आंसुओं में डूबा इंदौर का ऐतिहासिक फाइन आर्ट कॉलेज, क्लासरूम में घूम रहे कुत्ते और चूहे

मध्य प्रदेश के सबसे बड़े शहर इंदौर में कला और संस्कृति के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में शुमार 'गॉवमेंट इंस्टिट्यूट ऑफ फाइन आर्ट' आज अपनी बदहाली के आंसू रो रहा है। कभी मकबूल फिदा हुसैन, एन.एस. बेंद्रे और डी.जे. जोशी जैसी महान विभूतियों की कला साधना से सींचा गया यह कॉलेज आज बुनियादी सुविधाओं के भारी अभाव से जूझ रहा है। क्लासरूम के बीच घूमते कुत्ते, चूहे और छत से लगातार गिरता प्लास्टर यहां की खस्ताहाल स्थिति और प्रशासनिक उदासीनता की दास्तां बयां कर रहे हैं।

📜 1927 में हुई थी स्थापना, मेट्रो प्रोजेक्ट के कारण 2012 में किराए की इमारत में हुआ शिफ्ट

कला के पितृ पुरुष कहे जाने वाले डी.डी. देवलालीकर ने होलकर महाराज के अनुरोध पर साल 1927 में इस संस्थान की स्थापना की थी, जिसे 'देवलालीकर कला वीथिका' के नाम से जाना जाता था। एमजी रोड पर स्थित यह कॉलेज मूल रूप से भव्य परिसर में था, लेकिन मेट्रो रेल परियोजना के स्टेशन निर्माण के चलते वर्ष 2012 में इसे स्कीम नंबर 78 स्थित इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) की एक किराए की इमारत में शिफ्ट कर दिया गया। यह इमारत आर्ट कॉलेज के मान से नहीं बनी थी, इसलिए जगह की कमी के चलते स्कल्पचर, पेंटिंग, प्रिंटिंग और एप्लाइड आर्ट जैसी महत्वपूर्ण क्लासेज सुचारु रूप से चलाना असंभव हो गया है।

👻 भूतिया परिसर में तब्दील हुई बिल्डिंग, छात्रों को नहीं मिल पा रही पेंटिंग प्रदर्शनी के लिए जगह

रखरखाव के अभाव में यह इमारत अंदर और बाहर दोनों तरफ से एक वीरान परिसर जैसी नजर आती है। कंप्यूटर लैब के लिए कोई जगह नहीं है और दिन के समय भी कक्षाओं में आवारा कुत्ते और जीव-जंतु डेरा डाले रहते हैं, जिनके बीच छात्र पढ़ाई करने को मजबूर हैं। कॉलेज के पूर्व छात्र और फैकल्टी सदस्यों ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश प्रक्रिया के बाद यहां प्रतिभाशाली छात्र आते हैं, लेकिन उन्हें अपनी पेंटिंग की प्रदर्शनी लगाने तक के लिए पर्याप्त स्थान नहीं मिलता। हालांकि, इस मामले में सांसद शंकर लालवानी ने बताया कि संस्कृति विभाग और आईडीए के बीच नई बिल्डिंग को लेकर संवाद जारी है, और जल्द ही इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाएगा।

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