शाहजहाँनी पार्क में हेट स्पीच और मॉब लिंचिंग के खिलाफ अल्पसंख्यक समुदायों का शांतिपूर्ण प्रदर्शन
भोपाल के शाहजहाँनी पार्क में अल्पसंख्यक समुदायों ने हेट स्पीच और मॉब लिंचिंग के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर संविधान के तहत कार्रवाई की मांग की।
देश भर में बढ़ रहे हेट स्पीच, मॉब लिंचिंग और धार्मिक भेदभाव के मामलों को लेकर शुक्रवार को भोपाल के ऐतिहासिक शाहजहाँनी पार्क में विभिन्न अल्पसंख्यक समुदायों और सामाजिक संगठनों ने एक बैनर तले शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। इस दौरान 'संयुक्त मंच' ने नफरत और सामाजिक अन्याय के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाई तथा स्थानीय प्रशासन व सरकार से संविधान के दायरे में रहकर निष्पक्ष कार्रवाई करने की पुरजोर मांग की। मंच के वक्ताओं ने स्पष्ट कहा कि किसी व्यक्ति पर सिर्फ आरोप लगना और अदालत में उसका दोषी साबित होना दो अलग बातें हैं, लेकिन कई मामलों में जांच पूरी होने से पहले ही भीड़ दबाव बनाने लगती है, जिससे देश की न्याय व्यवस्था पर से लोगों का भरोसा डगमगाने का खतरा पैदा हो रहा है।
⛪ जांच से पहले भीड़ का दबाव बनाना कानून के खिलाफ: रेवरेंड फादर अनिल मार्टिन
ईसाई समाज के प्रमुख प्रतिनिधि रेवरेंड फादर अनिल मार्टिन ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि धार्मिक मामलों में आपत्तिजनक बयानबाजी और नफरत फैलाने वाली भाषा सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचा रही है। उन्होंने कहा कि अक्सर भीड़ के रूप में लोग थानों और प्रशासनिक कार्यालयों में पहुंचकर जांच प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही मनमाफिक कार्रवाई का दबाव बनाने की कोशिश करते हैं, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए ठीक नहीं है। फादर मार्टिन ने पुराने दिनों को याद दिलाते हुए कहा कि भारत में विभिन्न धर्मों के लोग एक-दूसरे के त्योहारों में मिठाइयां बांटते थे और सामाजिक मेलजोल की गहरी परंपरा थी। उन्होंने प्रेम, सम्मान और आपसी भाईचारे की इसी संस्कृति को पुनः मजबूत करने पर जोर दिया।
⚖️ भीड़ नहीं, न्यायपालिका करे फैसला: संयुक्त मंच ने राष्ट्रपति व प्रशासन के नाम सौंपा ज्ञापन
मिशन व्यवस्था परिवर्तन समता संघ के संस्थापक डॉ. पुष्पेंद्र बहुजन ने कहा कि जाति या धर्म के आधार पर किसी नागरिक को निशाना बनाना और सड़क पर भीड़ द्वारा फैसला सुनाना कानून के शासन का सीधा उल्लंघन है। देश में संविधान और स्वतंत्र न्यायपालिका मौजूद है, इसलिए सभी फैसले संवैधानिक प्रक्रिया के तहत ही होने चाहिए। प्रदर्शन के अंत में संयुक्त मंच ने एक ज्ञापन सौंपकर हेट स्पीच और मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर रोक लगाने, दलित, आदिवासी, पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्गों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने तथा शिक्षा व रोजगार में भेदभाव समाप्त करने की मांग की।
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