बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के बफर जोन में पर्यटकों का जबरदस्त उत्साह, 100 दिनों में हजारों सैलानियों ने किए दीदार
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के बफर जोन में पर्यटकों का भारी उत्साह देखा जा रहा है। पिछले 100 दिनों में 802 वाहनों के जरिए हजारों पर्यटकों ने सफारी का आनंद लिया है।
मध्य प्रदेश का विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व पर्यटकों के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र बना हुआ है। हालांकि मानसून ब्रेक के बाद 1 अक्टूबर से कोर जोन की सफारी भी शुरू हो चुकी है, लेकिन बांधवगढ़ का बफर जोन पूरे साल पर्यटकों की पहली पसंद बना हुआ है। पिछले 100 दिनों के आंकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं कि पर्यटक कोर जोन की तरह ही बफर जोन में भी जंगल सफारी का बढ़-चढ़कर आनंद ले रहे हैं।
🚙 802 वाहनों में 3,780 पर्यटकों ने किया बफर जोन का भ्रमण, अगस्त में रहा सबसे ज्यादा उत्साह
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 1 जुलाई 2026 से 30 जून 2027 तक के नए सालाना पर्यटन सत्र के शुरुआती 100 दिन बेहद शानदार रहे हैं। मानसून के दौरान कोर क्षेत्र बंद रहने पर भी 1 जुलाई से बफर जोन में सफारी गतिविधियां निरंतर जारी रहीं। 1 जुलाई से 08 अक्टूबर 2026 तक की अवधि में परासी और पचपेड़ी पर्यटन गेट पर कुल 802 वाहनों में 3,780 पर्यटकों (3,758 भारतीय और 22 विदेशी) ने बफर जोन का दीदार किया। जोनवार आंकड़ों के मुताबिक परासी जोन में 550 वाहनों (2,588 पर्यटक) और पचपेड़ी जोन में 252 वाहनों (1,192 पर्यटक) ने भ्रमण किया। खास बात यह रही कि अकेले अगस्त महीने में पर्यटकों का सबसे अधिक आगमन दर्ज किया गया।
🌿 मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व की अनूठी मिसाल, स्थानीय लोगों को मिल रहा रोजगार
क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय ने बताया कि परासी और पचपेड़ी बफर जोन में पर्यटकों को बाघ सहित अन्य वन्यप्राणियों के नियमित दीदार हो रहे हैं, जिससे सैलानियों में भारी उत्साह है। बफर क्षेत्र में पर्यटन संचालन से न केवल स्थानीय समुदायों को रोजगार और आजीविका के नए अवसर मिल रहे हैं, बल्कि वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता भी तेजी से बढ़ रही है। बांधवगढ़ के बफर जोन की सबसे बड़ी खूबी यहां का मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व (Human-Wildlife Coexistence) है, जहां प्रकृति की बेजोड़ खूबसूरती के साथ वन्यजीवों के आसानी से दर्शन हो जाते हैं।
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