होम साइंस कॉलेज में रोजगार उन्मुख शिक्षा, एंजाइम निर्माण से विदेशी मुद्रा कमाने के गुर सीख रहीं छात्राएं

जबलपुर के होम साइंस कॉलेज में एंजाइम के जरिए रोजगार और व्यापार की संभावनाओं पर स्पेशल सेमिनार आयोजित किया गया। बायोलॉजी के छात्र इसमें ले सकते हैं हिस्सा।

Oct 11, 2026 - 13:34
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होम साइंस कॉलेज में रोजगार उन्मुख शिक्षा, एंजाइम निर्माण से विदेशी मुद्रा कमाने के गुर सीख रहीं छात्राएं

अभी तक रोजगारोन्मुख शिक्षा के लिए केवल परंपरागत कोर्सों पर ही चर्चा होती रही है, लेकिन हाल ही में जबलपुर के होम साइंस कॉलेज (मोहनलाल हरगोविंद दास स्वशासी महिला महाविद्यालय) में एक नया और क्रांतिकारी कदम उठाया गया। कॉलेज में 'एंजाइम के जरिए रोजगार कैसे विकसित किया जाए' विषय पर एक विशेष राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। इस सेमिनार में जाने-माने वैज्ञानिक और कारोबारी डॉ. अनिल गुप्ता ने शिरकत की, जिन्होंने छात्राओं को बताया कि किस तरह बायोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी से जुड़े छात्र एंजाइम के क्षेत्र में अपना बिजनेस शुरू करके न सिर्फ देश में बल्कि विदेशों तक अपनी पहुंच बना सकते हैं और विदेशी मुद्रा अर्जित कर सकते हैं।

🔬 क्या होता है एंजाइम और कैसे होता है इसका निर्माण?

होम साइंस कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी विभाग की एचओडी डॉ. मनीषा राठी ने बताया कि एंजाइम एक प्रकार का जैविक उत्प्रेरक (Biological Catalyst) होता है, जो शरीर और औद्योगिक प्रक्रियाओं में रासायनिक क्रियाओं को तेज करता है। यह मुख्य रूप से प्रोटीन से बना होता है और भोजन पचाने, दूध से पनीर बनाने, डिटर्जेंट में दाग हटाने तथा खाद्य प्रसंस्करण जैसे कार्यों में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। कॉलेज की प्रयोगशालाओं में छात्राओं को बैक्टीरिया, यीस्ट और फफूंद जैसे सूक्ष्मजीवों की मदद से 'फर्मेंटेशन' (Fermentation) प्रक्रिया के जरिए एंजाइम तैयार करने की तकनीकी ट्रेनिंग दी जाती है, ताकि वे भविष्य में खुद का स्टार्टअप शुरू कर सकें।

💼 किन क्षेत्रों में है एंजाइम की सबसे ज्यादा डिमांड और भारत की स्थिति?

बायोसाइंस विभाग की प्राध्यापक डॉ. तिलोत्मा चौधरी और लेक्चरर श्वेता चौबे ने बताया कि एंजाइम का उपयोग विभिन्न उद्योगों में अनिवार्य रूप से होता है:

  • डिटर्जेंट एंजाइम: प्रोटीएज, एमाइलेज और लाइपेज जैसे एंजाइम डिटर्जेंट पाउडर और क्लीनिंग प्रोडक्ट्स में काम आते हैं।

  • बेकरी एंजाइम: ब्रेड और बिस्किट की गुणवत्ता सुधारने के लिए फूड-ग्रेड एंजाइम बेहद जरूरी हैं।

  • टेक्सटाइल और पशु आहार: फाइबर को नरम करने और पोल्ट्री फीड के लिए एंजाइम उद्योग तेजी से बढ़ रहा है।

  • फल और जूस प्रसंस्करण: पेक्टिनेज एंजाइम की मदद से फलों से शुद्ध रस निकाला जाता है।

विश्व बैंक (WITS/UN Comtrade) के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने 2024 में लगभग 17.14 करोड़ डॉलर (करीब 1,430 करोड़ रुपये) के एंजाइम और तैयार उत्पाद आयात किए हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भारत में इस क्षेत्र में स्वरोजगार और नए उद्योगों की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।

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