कम बारिश से सूखे की स्थिति में धार, जल संरक्षण और मुआवजा की मांग को लेकर किसानों का जल सत्याग्रह
धार जिले में इस बार कम बारिश होने से तालाब और जलस्रोत खाली रह गए हैं। रबी की फसल और पीने के पानी का संकट गहराने पर किसानों ने जल सत्याग्रह शुरू किया है।
मानसून का सीजन बीतते ही मध्य प्रदेश के धार जिले में जल संकट की गंभीर आहट सुनाई देने लगी है। पर्याप्त बारिश न होने के कारण जिले के प्रमुख तालाब, बावड़ियां और जलस्रोत पूरी तरह से नहीं भर पाए हैं। सिंचाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले माही और मान बांध भी अपनी पूरी क्षमता से काफी खाली रह गए हैं। जलस्रोतों में पानी की भारी कमी के कारण आगामी रबी फसल की सिंचाई, पशुपालन और गर्मी के दिनों में पीने के पानी का बड़ा संकट खड़ा होने की आशंका जताई जा रही है।
🌾 किसानों का जल सत्याग्रह और सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग, बोरिंग सूखने की कगार पर
जिले में गहराती पानी की किल्लत को देखते हुए किसान संगठनों ने धार को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग तेज कर दी है। किसान अपनी विभिन्न मांगों और जल स्रोतों के संरक्षण को लेकर 'जल सत्याग्रह' कर रहे हैं। स्थानीय निवासियों और किसानों का कहना है कि धार के कई तालाब एक-दूसरे से जुड़े हुए थे और पहले कम गहराई में ही पानी मिल जाता था, लेकिन रखरखाव के अभाव और जल स्तर नीचे गिरने से अब बोरिंग भी सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं। अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो रबी की फसल बुरी तरह प्रभावित हो सकती है।
🏛️ प्रशासन की कार्ययोजना और जल संरक्षण पर उठ रहे सवाल
जल संकट की भयावहता को देखते हुए धार कलेक्टर राजीव रंजन मीणा ने बताया कि जिले में अल्प वर्षा की स्थिति को ध्यान में रखते हुए शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के सभी जल स्रोतों में उपलब्ध पानी को संरक्षित करने के निर्देश दिए गए हैं। सतही जल (Surface Water) के सही प्रबंधन के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की जा रही है। वहीं दूसरी ओर, सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि बारिश से पहले नालों की सफाई न होने और बड़े भवनों में 'रेन वाटर हार्वेस्टिंग' सिस्टम की अनदेखी के कारण बारिश का पानी सही तरीके से ज़मीन के भीतर नहीं पहुँच पाया।
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