NIT पासआउट युवक ने 3 साल में बनाई 75 लाख की संपत्ति, नौकरी छूटने के बाद भी हासिल किया 50 लाख का पैकेज

उज्जैन के 26 वर्षीय अर्जुन परमार ने 18 हजार रुपये की नौकरी से शुरुआत कर 50 लाख का सालाना पैकेज और 75 लाख रुपये की संपत्ति बनाई है। जानिए उनकी प्रेरणादायक कहानी।

Oct 11, 2026 - 17:31
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NIT पासआउट युवक ने 3 साल में बनाई 75 लाख की संपत्ति, नौकरी छूटने के बाद भी हासिल किया 50 लाख का पैकेज

एक समय था जब मध्य प्रदेश के उज्जैन निवासी अर्जुन परमार की महीने की इन-हैंड कमाई महज 18,000 रुपये थी। आज 26 वर्ष की उम्र में उनका सालाना सैलरी पैकेज करीब 50 लाख रुपये पहुंच चुका है। इतना ही नहीं, उन्होंने अपनी लगन, कोडिंग स्किल और अनुशासित निवेश की बदौलत महज तीन वर्षों में 65 से 75 लाख रुपये की कुल वित्तीय संपत्ति भी खड़ी कर ली है। मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाले अर्जुन के पिता इलेक्ट्रिकल सामान का छोटा कारोबार चलाते हैं और मां गृहिणी हैं। एनआईटी (NIT) से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद अर्जुन ने टेक महिंद्रा से अपने करियर की शुरुआत की थी।

📈 एक्सेंचर से ग्लोबल टेक कंपनी तक का सफर: नौकरी जाने के झटके के बावजूद नहीं टूटे

अक्टूबर 2024 में एक्सेंचर ज्वाइन करने पर अर्जुन का पैकेज 12 लाख रुपये हुआ। इसके बाद अगस्त 2025 में एक ग्लोबल टेक कंपनी ने उन्हें 45 लाख रुपये का सालाना पैकेज ऑफर किया। हालांकि, मई 2026 में कंपनी के पुनर्गठन (Restructuring) के कारण उनकी नौकरी चली गई। अचानक लगे इस बड़े झटके के बावजूद करीब 6 लाख रुपये के इमरजेंसी फंड की वजह से उन्हें घबराने की जरूरत नहीं पड़ी। उन्होंने फिर से सिस्टम डिजाइन और कोडिंग इंटरव्यू की तैयारी की और सितंबर 2026 में एक अन्य बड़ी ग्लोबल टेक कंपनी में 50 लाख रुपये का सालाना सीटीसी (CTC) हासिल कर लिया, जिससे टैक्स कटने के बाद उन्हें प्रतिमाह 2.8 से 3 लाख रुपये इन-हैंड मिलते हैं।

🏠 तीन साल में बनाई 75 लाख की संपत्ति और उज्जैन में माता-पिता के लिए खरीदा घर

अर्जुन के कुल निवेश पोर्टफोलियो में 35 से 40 लाख रुपये म्यूचुअल फंड (SIP) में, 7 से 10 लाख रुपये डायरेक्ट शेयर्स में, 8 से 10 लाख रुपये कंपनी के RSU और शेष रकम ईपीएफ, गोल्ड व इमरजेंसी फंड में है। अर्जुन ने उज्जैन में अपने माता-पिता का सपना पूरा करते हुए 40 से 45 लाख रुपये का एक घर खरीदा है। अब उनका अगला लक्ष्य 35 साल की उम्र तक 5 करोड़ रुपये का पोर्टफोलियो बनाकर 40 की उम्र तक आर्थिक स्वतंत्रता (Financial Independence) हासिल करना है। उनकी कहानी से यह स्पष्ट सीख मिलती है कि अनुशासित बचत, निरंतर स्किल अपग्रेडेशन और आपातकालीन फंड की तैयारी से किसी भी कठिन परिस्थिति में वित्तीय सफलता हासिल की जा सकती है।

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