उदंती सीतानदी परिक्षेत्र में विस्थापन के विरोध में उमड़ा जनसैलाब, 128 गांवों के ग्रामीणों ने भरी हुंकार
गरियाबंद और धमतरी के सीतानदी उदंती परिक्षेत्र में विस्थापन की आशंका के खिलाफ 128 गांवों के ग्रामीणों ने जनसभा कर विरोध जताया और विकास की मांग की।
गरियाबंद और धमतरी जिले के सीमावर्ती संवेदनशील उदंती सीतानदी परिक्षेत्र में प्रस्तावित विस्थापन की आशंका को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और आदिवासियों का भारी आक्रोश खुलकर सामने आया है। राजापड़ाव क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम मोंगराडीह में 'जल जंगल जमीन बचाओ संघर्ष समिति सीतानदी उदंती क्षेत्र' के बैनर तले एक विशाल जनसभा का आयोजन किया गया। इस बैठक में आसपास के 128 गांवों और विभिन्न पारा-टोलों से हजारों की संख्या में ग्रामीण और आदिवासी समाज के लोग एकत्र हुए, जिससे पूरा इलाका जनसैलाब से पट गया।
🚫 'पुरखों की जमीन से विस्थापन कतई मंजूर नहीं': सड़क, पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग
जनसभा के दौरान ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में प्रशासनिक अधिकारियों और शासन को चेताया कि उन्हें अपनी पुश्तैनी और पुरखों की जमीन से किसी भी कीमत पर विस्थापन मंजूर नहीं है। ग्रामीणों का कहना था कि सरकार को विस्थापन की योजना बनाने के बजाय इस दुर्गम क्षेत्र में सड़क, शुद्ध पेयजल और बिजली जैसी मूलभूत और बुनियादी सुविधाओं का विकास करना चाहिए, ताकि आम जनजीवन बेहतर हो सके। इस विरोध प्रदर्शन ने क्षेत्र में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल को काफी तेज कर दिया है।
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