पुरानी किताबों का रिड्यूस, रीयूज और रीसायकल, देवी अन्नपूर्णा विद्यालय में शुरू हुई RRR लाइब्रेरी

इंदौर नगर निगम ने स्वच्छता के 3R मॉडल (Reduce, Reuse, Recycle) को शिक्षा में अपनाते हुए 12 हजार पुरानी किताबों से जरूरतमंद बच्चों के लिए लाइब्रेरी शुरू की है।

Oct 15, 2026 - 16:02
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पुरानी किताबों का रिड्यूस, रीयूज और रीसायकल, देवी अन्नपूर्णा विद्यालय में शुरू हुई RRR लाइब्रेरी

इंदौर। देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में अब स्वच्छता का 3R (Reduce, Reuse, Recycle) मॉडल विद्यार्थियों की लाइब्रेरी में भी सफलता के साथ अपनाया जा रहा है। शहर के ऐसे छात्र जो अपनी कक्षा उत्तीर्ण कर अगली क्लास में चले जाते हैं, उनकी पुरानी किताबों को जरूरतमंद बच्चों के अध्ययन के लिए उपयोग में लाया जाएगा। स्वच्छता रैंकिंग में लगातार शीर्ष स्थान पर रहने वाले इंदौर ने अनुपयोगी किताबों को जरूरतमंद विद्यार्थियों तक पहुंचाने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए शहर के 7 स्कूलों में RRR (रीड्यूस, रीयूज, रीसायकल) लाइब्रेरी स्थापित करने की योजना पर काम शुरू कर दिया है।

🏫 3R सेंटरों पर जमा हुईं 12 हजार से अधिक पुस्तकें: नगर निगम और महापौर की अपील का दिखा असर

दरअसल, शहर में कई ऐसे बच्चे हैं जो हर साल नई और महंगी पुस्तकें खरीदने में सक्षम नहीं होते। वहीं, उत्तीर्ण होकर अगली कक्षा में जाने वाले छात्रों के लिए पिछली कक्षा की पुस्तकें अनुपयोगी हो जाती हैं। इस समस्या का समाधान निकालते हुए इंदौर नगर निगम और महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने शहर के सभी 22 जोन में स्थापित 3R सेंटरों पर पुरानी पुस्तकें दान करने की अपील की थी। इस पहल के तहत नगर निगम के पास करीब 12,000 से अधिक पुस्तकों का बड़ा बैंक तैयार हो चुका है, जिससे शहर के विभिन्न स्कूलों में पुस्तकालय शुरू किए जा रहे हैं।

🏛️ अन्नपूर्णा विद्यालय से हुई अभियान की शुरुआत: महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने किया RRR लाइब्रेरी का उद्घाटन

इसी नवाचार के तहत महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने अन्नपूर्णा मंदिर परिसर स्थित देवी अन्नपूर्णा विद्यालय में पहली RRR लाइब्रेरी का शुभारंभ किया। इस लाइब्रेरी में लगभग 1,000 पुस्तकें उपलब्ध कराई गई हैं, जिनका उपयोग स्कूल के छात्र विभिन्न विषयों के अध्ययन के लिए कर सकेंगे। महापौर ने बताया कि नगर निगम इस पहल को एक रोल मॉडल के रूप में विकसित कर रहा है, ताकि आने वाले समय में शहर के अन्य शासकीय और निजी शैक्षणिक संस्थानों में भी इसे विस्तार दिया जा सके।

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