विश्व पर्यटन मानचित्र पर चमकेगा सागर का एरण, लिविंग कल्चरल स्पेस के रूप में होगा विकसित

सागर के ऐतिहासिक एरण को लिविंग कल्चरल स्पेस के रूप में विकसित किया जा रहा है। अब कोलकाता म्यूजियम से समुद्रगुप्त के अभिलेख को वापस लाने की मांग तेज हो गई है।

Oct 15, 2026 - 16:19
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विश्व पर्यटन मानचित्र पर चमकेगा सागर का एरण, लिविंग कल्चरल स्पेस के रूप में होगा विकसित

सागर। भारत सरकार द्वारा देश के 15 प्रमुख 'लिविंग कल्चरल स्पेस' की सूची में सागर जिले के ऐतिहासिक एरण को शामिल किए जाने के बाद इसे एक वैश्विक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की तैयारियां तेज हो गई हैं। एरण एक ऐसा समृद्ध पुरास्थल है, जहां हड़प्पाकालीन ताम्र-पाषाण संस्कृति से लेकर गुप्तकालीन उत्कृष्ट वास्तुकला के अनेकों दुर्लभ उदाहरण मौजूद हैं। इसे केंद्र सरकार की 'DESH' योजना के तहत चुना गया है। इस विकास के बीच, अंग्रेजों के शासनकाल के दौरान कोलकाता और लंदन म्यूजियम ले जाए गए एरण के प्राचीन पुरावशेषों और मूर्तियों को उनके मूल स्थान पर वापस लाने की मांग ने जोर पकड़ लिया है, जिसमें सबसे प्रमुख मांग समुद्रगुप्त के ऐतिहासिक अभिलेख को वापस लाने की है।

📜 कोलकाता म्यूजियम में रखा है समुद्रगुप्त का दुर्लभ अभिलेख: जानिए क्या है इसका ऐतिहासिक महत्व

एरण के विष्णु मंदिर के पास से प्राप्त हुआ समुद्रगुप्त का यह प्रसिद्ध अभिलेख वर्तमान में कोलकाता के नेशनल म्यूजियम में सुरक्षित रखा गया है। इस गुप्तकालीन ब्राह्मी लिपि और संस्कृत भाषा में लिखे गए अभिलेख की खोज ब्रिटिश पुरातत्वविद् जनरल एलेक्जेंडर कनिंघम ने 1874-75 में की थी और वे इसे अपने साथ ले गए थे। इंदिरा गांधी जनजातीय विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के प्रोफेसर डॉ. मोहनलाल चढ़ार के अनुसार, इस अभिलेख में समुद्रगुप्त को वीरता, नीति और पराक्रम में कुबेर व यम के समान बताया गया है। साथ ही इसमें समुद्रगुप्त की पत्नी 'दत्तदेवी' और उनके सुशासन का विस्तृत उल्लेख मिलता है।

🎯 सांसद लता वानखेड़े करेंगी केंद्र सरकार से प्रयास: वापस लाए जाएंगे एरण के गौरवशाली अवशेष

स्थानीय सांसद लता वानखेड़े ने इस दिशा में सकारात्मक पहल करते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा एरण को मध्य प्रदेश के सांस्कृतिक कैलेंडर में शामिल कर महोत्सव की शुरुआत कराई गई है। उन्होंने केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को पत्र लिखकर एरण के विकास का आग्रह किया था, जिसके परिणामस्वरूप इसे लिविंग कल्चरल स्पेस का दर्जा मिला है। सांसद ने कहा है कि एरण से लंदन और कोलकाता ले जाए गए समुद्रगुप्त के प्रसिद्ध अभिलेख तथा अन्य पुरातत्व महत्व की मूर्तियों को वापस लाने के लिए वे केंद्र सरकार के माध्यम से हरसंभव प्रयास करेंगी।

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