कोरोना योद्धाओं का अनोखा प्रदर्शन, महिला स्वास्थ्यकर्मियों ने पहनी PPE किट तो पुरुष हुए अर्धनग्न
भोपाल के शाहजहांनी पार्क में मध्य प्रदेश के कोरोना योद्धाओं का अनिश्चितकालीन धरना जारी है। प्रदर्शनकारियों ने पीपीई किट पहनकर और अर्धनग्न होकर नौकरी की मांग की।
भोपाल। कोरोना महामारी को बीते हुए पांच साल से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन अपनी जान जोखिम में डालकर सेवाएं देने वाले प्रदेश के करीब 4,000 कोरोना योद्धा आज भी रोजगार की तलाश में सड़कों पर संघर्ष करने को मजबूर हैं। मध्य प्रदेश कोविड-19 आयुष चिकित्सक संघ के बैनर तले कोरोना योद्धाओं का भोपाल के शाहजहांनी और नीलम पार्क में अनिश्चितकालीन धरना गुरुवार को 11वें दिन भी जारी रहा। सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के लिए प्रदर्शनकारियों ने अनोखा तरीका अपनाया, जहां महिला स्वास्थ्यकर्मियों ने पीपीई किट पहनकर तो पुरुष स्वास्थ्यकर्मियों ने अर्धनग्न होकर सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया।
📜 'दो साल तक सेवाएं लीं और अचानक बजट का हवाला देकर बाहर कर दिया': छलकया दर्द
राजगढ़ से आकर धरने पर बैठीं प्रियंका ने बताया कि सरकार ने पहले 89-89 दिन करके दो साल तक सेवाएं लीं, और फिर अचानक बिना किसी ठोस कारण के यह कहकर नौकरी से निकाल दिया कि सरकार के पास बजट नहीं है। वहीं छिंदवाड़ा से आए डॉ. विनोद कुमार ने विरोध जताते हुए कहा कि संकट के समय वे सरकार के साथ खड़े रहे, लेकिन अब जब नई वैकेंसी आ रही हैं तो उन्हें दरकिनार किया जा रहा है, जिससे कई डॉक्टरों की उम्र भी निकल चुकी है। संघ के प्रदेश संयोजक डॉ. अंकित असाटी ने कहा कि महामारी के दौर में अपनी जान की परवाह न करने वाले ये स्वास्थ्यकर्मी आज बेरोजगारी और भारी आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।
🏛️ उत्तर प्रदेश और हरियाणा की तर्ज पर फैसले की मांग: दीपावली भी धरने पर ही मनाएंगे योद्धा
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा, बिहार और महाराष्ट्र जैसे राज्यों ने कोरोना काल में सेवाएं देने वाले स्वास्थ्यकर्मियों को रोजगार में बनाए रखने या पुनर्नियोजित करने के प्रयास किए हैं, लेकिन मध्य प्रदेश में उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। राज्य सरकार एक तरफ स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और बड़े बजट की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ बजट की कमी का हवाला दे रही है। कोरोना योद्धाओं ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही उनकी पुनर्बहाली को लेकर सकारात्मक फैसला नहीं लिया, तो वे इस बार अपनी दीपावली भी इसी धरने पर ही मनाने को मजबूर होंगे।
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