विलुप्ति की कगार से 1100 तक पहुंचा कान्हा का गौरव 'बारहसिंगा', बांधवगढ़ भेजने की तैयारी

कान्हा नेशनल पार्क में जुलाई से अक्टूबर के बीच 51 नए बारहसिंगा नवजातों का जन्म हुआ है, जिससे इनकी कुल संख्या बढ़कर 1100 हो गई है।

Oct 15, 2026 - 20:51
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विलुप्ति की कगार से 1100 तक पहुंचा कान्हा का गौरव 'बारहसिंगा', बांधवगढ़ भेजने की तैयारी

मंडला। मध्य प्रदेश के विश्व प्रसिद्ध कान्हा नेशनल पार्क से वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक बेहद खुशखबरी सामने आई है। कान्हा का गौरव और मध्य प्रदेश का राज्य पशु 'हार्ड-ग्राउंड बारहसिंगा', जो कभी विलुप्ति की कगार पर पहुंच गया था, उसके संरक्षण में पार्क प्रबंधन को बड़ी सफलता मिली है। कान्हा के प्राकृतिक घास के मैदानों में जुलाई से लेकर अक्टूबर मध्य तक 51 नए बारहसिंगा नवजात बच्चों (छावनों) ने जन्म लिया है। इन नए सदस्यों के आगमन के साथ ही कान्हा में बारहसिंगा की कुल आबादी बढ़कर अब 1100 के पार पहुंच गई है, जिससे पार्क की ऐतिहासिक पहचान और अधिक समृद्ध हो गई है।

🛡️ अत्यंत असहाय होते हैं नवजात छावने, वनकर्मियों की टीम रख रही है 24 घंटे कड़ी नजर

कान्हा नेशनल पार्क के घास के मैदानों में बारहसिंगा के प्रजनन और जन्म की प्रक्रिया जुलाई से शुरू होकर जनवरी-फरवरी तक चलती है। जन्म के समय बारहसिंगा का नवजात बच्चा बेहद असहाय होता है और तुरंत चलने में असमर्थ रहता है। इस नाजुक स्थिति को देखते हुए कान्हा प्रबंधन द्वारा विशेष सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। हर नवजात छावने पर वनकर्मियों की समर्पित टीमें चौबीसों घंटे निगरानी रख रही हैं, ताकि जंगली हिंसक जानवरों या किसी अन्य खतरे से इनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। वनकर्मियों की इस निरंतर मेहनत के चलते ही नवजातों का सुरक्षित पालन-पोषण हो पा रहा है।

🚚 1970 में महज 66 रह गए थे बारहसिंगा, अब बांधवगढ़ नेशनल पार्क में बसाने की तैयारी

कान्हा नेशनल पार्क के डायरेक्टर रविंद्र मणि त्रिपाठी ने बताया कि वर्ष 1970 में कान्हा में बारहसिंगा की संख्या घटकर महज 66 रह गई थी। वैज्ञानिक प्रबंधन, समर्पित निगरानी और वनकर्मियों के अथक प्रयासों से आज यह संख्या 1100 तक पहुंची है, जो वैश्विक वन्यजीव संरक्षण के इतिहास में एक मिसाल है। कान्हा से बारहसिंगा को सतपुड़ा और संजय गांधी नेशनल पार्क भी भेजा गया है जहाँ उनकी संख्या बढ़ रही है। अब इन्हें बांधवगढ़ नेशनल पार्क भेजने की योजना बनाई जा रही है। पार्क प्रबंधन का मुख्य लक्ष्य मध्य प्रदेश में इनकी संख्या को 1500 के पार ले जाना और अन्य जंगलों को आबाद करना है।

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