'आर्शीवाद का दीया' कार्यक्रम के टेंडर पर घमासान, कांग्रेस ने 6 घंटे में ठेका देने का आरोप लगाकर की सीबीआई जांच की मांग

मध्य प्रदेश में 'आर्शीवाद का दीया' कार्यक्रम के टेंडर को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने सिर्फ 6 घंटे में टेंडर प्रक्रिया पूरी कर अहमदाबाद की कंपनी को ठेका देने का आरोप लगाया है।

Oct 16, 2026 - 16:42
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'आर्शीवाद का दीया' कार्यक्रम के टेंडर पर घमासान, कांग्रेस ने 6 घंटे में ठेका देने का आरोप लगाकर की सीबीआई जांच की मांग

भोपाल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर मध्य प्रदेश में आयोजित 'आर्शीवाद का दीया' कार्यक्रम की टेंडर प्रक्रिया गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उज्जैन में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम के लिए महज 6 घंटे के भीतर टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई और गुजरात के अहमदाबाद की एक कंपनी को 4.18 करोड़ रुपये का ठेका दे दिया गया। कांग्रेस का दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया में सरकारी 'भंडार क्रय नियमों' (Store Purchase Rules) की धज्जियां उड़ाई गईं और पारदर्शिता को ताक पर रख दिया गया।

⏱️ मात्र कुछ घंटों में जारी हुआ टेंडर और रात को हो गया फैसला, भंडार क्रय नियमों के उल्लंघन का दावा

कांग्रेस नेता अमित शर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि इस कार्यक्रम के नाम पर भ्रष्टाचार का दीया जलाया गया है। नियमों के मुताबिक किसी भी सरकारी टेंडर के लिए 3 से 7 दिन की प्रक्रिया अनिवार्य होती है, लेकिन इस मामले में मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग के तहत 16 सितंबर को दोपहर 3:46 बजे टेंडर जारी किया गया, जिसकी अंतिम समय-सीमा शाम 5 बजे तक ही रखी गई थी। आरोप है कि तय समय के बाद अहमदाबाद की कंपनी और एक अन्य कंपनी ने आवेदन किया, और महज डेढ़ घंटे के भीतर रात को ही अहमदाबाद की फर्म को 4.18 करोड़ रुपये का कार्य आदेश जारी कर दिया गया।

🔍 संविदा कर्मचारियों को आगे करने का आरोप, कांग्रेस ने मांगा ऑडिट और सीबीआई जांच का आदेश

कांग्रेस ने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सीबीआई से कराई जानी चाहिए। आरोप लगाया गया है कि इस पूरी प्रक्रिया में विभाग के संविदा पर कार्यरत दो कर्मचारियों को आगे किया गया और आनन-फानन में उज्जैन कलेक्टर को आदेश जारी कर 17 सितंबर के कार्यक्रम के लिए कंपनी को अधिकृत कर दिया गया। कांग्रेस ने कार्यक्रम पर हुए वास्तविक खर्च, सप्लीमेंट्री बिलों और भुगतान का विस्तृत ऑडिट कराने के साथ ही दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग उठाई है।

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