उज्जैन में सिंहस्थ की तैयारी तेज, शिप्रा किनारे अवैध होटल पर चला बुलडोजर; अंकपात मार्ग चौड़ीकरण पर मचा घमासान
सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत उज्जैन में शिप्रा किनारे अवैध होटल पर बुलडोजर कार्रवाई। अंकपात मार्ग चौड़ीकरण के दायरे में आ रहे मंदिरों पर पुजारियों का विरोध।
उज्जैन। आगामी 'सिंहस्थ 2028' के महाकुंभ को ध्यान में रखते हुए उज्जैन शहर में सड़क चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण का काम युद्धस्तर पर जारी है। इस प्रक्रिया के तहत अवैध निर्माणों और अतिक्रमण को लगातार ध्वस्त किया जा रहा है। शहर के अंकपात से खाकचौक की ओर जाने वाले मार्ग पर स्थित दो दर्जन से अधिक मंदिरों और आश्रमों पर उज्जैन विकास प्राधिकरण (UDA) द्वारा लाल निशान लगाए गए हैं, जिसके विरोध में स्थानीय पुजारियों और संतों ने उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। इसी कड़ी में शुक्रवार को नगर निगम की टीम ने शिप्रा नदी के किनारे जूना अखाड़े से जुड़े एक महामंडलेश्वर के अवैध होटल को पूरी तरह जमींदोज कर दिया।
🏨 दो बार नोटिस के बावजूद नहीं हटाया गया था 4 मंजिला होटल, पुलिस बल की मौजूदगी में हुई बड़ी कार्रवाई
हरियाणा सेवा आश्रम के ज्योतिगिरी महाराज के नाम पर बने इस आलीशान 4 मंजिला होटल पर प्रशासन का बुलडोजर चला। इस दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। नगर निगम के भवन अधिकारी राजकुमार राठौर ने बताया कि लालपुल से नरसिंह घाट वाले मार्ग पर शिप्रा नदी के तट के पास करीब 8 हजार वर्ग फीट क्षेत्र में यह चार मंजिला अवैध भवन तान दिया गया था। इसे हटाने के लिए आश्रम संचालक को पहले ही दो बार आधिकारिक नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन स्वेच्छा से निर्माण न हटाने पर निगम ने यह सख्त कार्रवाई की।
🌊 शिप्रा के 200 मीटर दायरे के निर्माण अवैध, अंकपात मार्ग को 100 फीट चौड़ा करने की योजना
इससे पहले नगर निगम ने माधवनानंदन आश्रम और शंकराचार्य मठ सहित पांच अन्य स्थानों पर भी ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की थी। यह सारी कार्रवाई माननीय न्यायालय में याचिकाकर्ता एवं एडवोकेट सत्यनारायण सोमानी की याचिका पर आए आदेशों के पालन में की गई है, जिसमें शिप्रा नदी के 100 से 200 मीटर के दायरे में आने वाले सभी निर्माणों को अवैध करार दिया गया है ताकि नदी की पवित्रता और सुरक्षा बनी रहे। दूसरी ओर, उज्जैन विकास प्राधिकरण की योजना के तहत अंकपात से खाकचौक मार्ग को जो अभी करीब 45 फीट चौड़ा है, उसे बढ़ाकर 100 फीट किया जाना है। इसी जद में दो दर्जन से अधिक मंदिर और आश्रम आ रहे हैं। उत्तरमुखी हनुमान मंदिर के पुजारियों का कहना है कि प्रशासन को पुजारियों के साथ बैठक कर आपसी सहमति से निर्णय लेना चाहिए, अन्यथा मंदिरों का मूल स्वरूप बचाने के लिए वे आंदोलन करने को विवश होंगे।
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