मध्य प्रदेश में फिर शुरू हुआ दलबदल का खेल? कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी का दावा- घर वापसी के लिए मिले 600 आवेदन
मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर दलबदल की चर्चा तेज हो गई है। पीसीसी चीफ जीतू पटवारी का दावा है कि कांग्रेस में लौटने के लिए 600 आवेदन मिले हैं।
मध्य प्रदेश की राजनीति में साल 2020 के राजनीतिक घटनाक्रम के बाद से ही हर चुनाव से कुछ साल पहले दलबदल की सियासत तेज होने की परंपरा सी बन गई है। आगामी 2028 के विधानसभा चुनावों से अभी पूरे दो साल का वक्त बाकी है, लेकिन उससे पहले ही कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के एक बयान ने सूबे की सियासत में हलचल पैदा कर दी है। जीतू पटवारी का दावा है कि उनके पास कांग्रेस छोड़कर जाने वाले उन नेताओं और कार्यकर्ताओं की करीब 600 एप्लीकेशन आ चुकी हैं, जो अब दोबारा पार्टी में 'घर वापसी' करना चाहते हैं। इस सूची में पूर्व विधायकों और पूर्व मंत्रियों से लेकर कई कद्दावर नाम शामिल हैं। क्या यह इस बात का संकेत है कि मध्य प्रदेश में एक बार फिर दलबदल का दौर शुरू होने जा रहा है?
🏛️ बीजेपी की 'न्यू ज्वाइनिंग टोली' और सिंधिया समर्थकों के रसूख पर टिकी नजरें, कांग्रेस के दावों पर सियासी बहस तेज
मप्र की राजनीति का इतिहास गवाह है कि साल 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ 22 से अधिक विधायकों के एकमुश्त कांग्रेस छोड़ने से कमलनाथ सरकार गिर गई थी और उसके बाद उपचुनावों व 2024 के आम चुनाव तक लगातार दलबदल का सिलसिला जारी रहा। बीजेपी ने इसके लिए बाकायदा 'न्यू ज्वाइनिंग टोली' बनाई थी, जिसके संयोजक नरोत्तम मिश्रा रहे और लाखों लोगों को पार्टी से जोड़ा गया। वर्तमान में गोविंद सिंह राजपूत, तुलसी सिलावट और प्रद्युम्न सिंह तोमर जैसे नेता बीजेपी सरकार में मंत्री पद पर हैं, जबकि रामनिवास रावत का भी पुनर्वास हुआ है। दूसरी ओर, बीजेपी प्रवक्ता मंजरी जैन का कहना है कि उनकी जानकारी में ऐसा कोई नहीं है जो बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में जाना चाहे, बल्कि जीतू पटवारी के अध्यक्ष बनने के बाद ढाई लाख कांग्रेसी बीजेपी का दामन थाम चुके हैं।
📊 1967 से लेकर 2020 तक का दलबदल का इतिहास, क्या फिर पलटेगी मध्य प्रदेश की सियासी बाजी?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मध्य प्रदेश में दलबदल की संस्कृति नई नहीं है। इसकी शुरुआत साल 1967 में हुई थी, जब द्वारका प्रसाद मिश्र और राजमाता विजयाराजे सिंधिया के बीच तनातनी के बाद गोविंद नारायण सिंह की अगुवाई में 36 कांग्रेस विधायकों ने पार्टी छोड़कर सरकार गिरा दी थी। 2020 का घटनाक्रम इसी का आधुनिक रूप माना गया। अब देखना यह है कि कांग्रेस की प्रदेश प्रवक्ता संगीता शर्मा द्वारा राहुल गांधी के नेतृत्व में बदलते राजनीतिक माहौल और जनता के समर्थन का जो दावा किया जा रहा है, वह कितना असरदार साबित होता है। वरिष्ठ विश्लेषक प्रकाश भटनागर का मानना है कि दूसरी पार्टियों से आकर बीजेपी के कड़े अनुशासन में ढलना हर किसी के लिए आसान नहीं होता, और यही वजह है कि कई बड़े नेता आज भी पार्टी में उचित पद की तलाश में हैं।
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