पेंच के कुएं में गिरी थी बाघिन, नौरादेही में चार स्वस्थ शावकों के साथ आई नजर; वन्यजीव प्रेमियों में खुशी

पेंच टाइगर रिजर्व के कुएं से सुरक्षित निकाली गई बाघिन अब नौरादेही में चार स्वस्थ शावकों के साथ नजर आई है। कैमरा ट्रैप की तस्वीरों से वन्यजीव प्रेमियों में खुशी।

Oct 16, 2026 - 20:16
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पेंच के कुएं में गिरी थी बाघिन, नौरादेही में चार स्वस्थ शावकों के साथ आई नजर; वन्यजीव प्रेमियों में खुशी

वह रोमांचक नजारा शायद ही कोई वन्यप्रेमी भूला हो, जब फरवरी 2025 में पेंच टाइगर रिजर्व में तीन साल की एक बाघिन जंगली सूअर का शिकार करते समय खुले कुएं में जा गिरी थी। इस घटना ने दुनिया भर का ध्यान खींचा था, क्योंकि कुएं में गिरने के बाद भी बाघिन ने सूअर पर हमला नहीं किया था बल्कि दोनों एक-दूसरे के साथ फिक्र जताते नजर आए थे। कड़े संघर्ष के बाद सुरक्षित रेस्क्यू कर इस बाघिन को मध्य प्रदेश के सबसे बड़े नौरादेही टाइगर रिजर्व में शिफ्ट किया गया था। अब इसी बाघिन को लेकर एक बेहद सुखद खबर सामने आई है, जहाँ वह अपने चार स्वस्थ शावकों के साथ कैमरा ट्रैप में कैद हुई है। इन तस्वीरों ने वन विभाग और वन्यजीव प्रेमियों में खुशी की लहर दौड़ा दी है।

🕳️ फरवरी 2025 में पेंच के बफर जोन में हुआ था रोमांचक रेस्क्यू, हाइड्रोलिक क्रेन और चारपाई से बाहर निकाले गए थे बाघिन और सूअर

यह वही बाघिन है जिसे 4 फरवरी 2025 को सिवनी जिले के पेंच टाइगर रिजर्व के हरदोली गांव में खुले कुएं से बाहर निकाला गया था। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुख्रियां बटोरने वाली इस घटना में बाघिन लगभग चार घंटे तक कुएं में फंसी रही थी। वन विभाग की टीम ने हाइड्रोलिक क्रेन और खाट (चारपाई) की मदद से बेहद चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर बाघिन और सूअर दोनों की जान बचाई थी। सफल रेस्क्यू के बाद इस बाघिन को रेडियो कॉलर पहनाकर नौरादेही के जंगलों में छोड़ा गया था, जहाँ वन विभाग के सामने इसके सफल पुनर्वास और मातृत्व को लेकर बड़ी चुनौतियां थीं।

📸 कैमरा ट्रैप में कैद हुए 6 महीने के चार स्वस्थ शावक, डिप्टी डायरेक्टर रजनीश कुमार सिंह ने बताया ऐतिहासिक सफलता

नौरादेही टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर रजनीश कुमार सिंह ने जानकारी दी कि रिजर्व के कैमरों में कैद ताजा तस्वीरों में चारों शावक करीब 6 माह की आयु पूरी कर चुके हैं और पूरी तरह स्वस्थ हैं। आमतौर पर प्राकृतिक आवास में शुरुआती छह महीनों के दौरान शावकों की मृत्यु दर (Mortality Rate) लगभग 50 प्रतिशत तक होती है, ऐसे में नर बाघों के खतरे और प्राकृतिक चुनौतियों के बीच चारों शावकों का स्वस्थ रहना एक असाधारण उपलब्धि है। यह सफलता बाघिन मां की कुशल देखरेख, नौरादेही के सुरक्षित प्राकृतिक वातावरण और मैदानी अमले की उत्कृष्ट मॉनिटरिंग का परिणाम है, जो वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो रहा है।

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