अश्विनि मास की अष्टमी पर निकली 27 किलोमीटर लंबी नगर पूजन यात्रा, मध्य प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना
उज्जैन में सम्राट विक्रमादित्य के समय से चली आ रही नगर पूजन परंपरा। कलेक्टर और एसपी ने देवी महामाया और महालया मंदिरों में की विशेष पूजा-अर्चना।
उज्जैन। मध्य प्रदेश के धार्मिक शहर उज्जैन में हर पर्व और परंपरा को अत्यंत अनूठे और प्राचीन विधान के साथ मनाया जाता है। इसी क्रम में अश्विन मास की अष्टमी पर यहां नगर की सुख-समृद्धि की कामना के लिए देवी महामाया और देवी महालया का विधिवत पूजन किया गया। चौबीस खंबा माता मंदिर के समीप आयोजित इस नगर पूजन की विशेषता यह है कि इसे सम्राट विक्रमादित्य के समय से अनवरत निभाया जा रहा है, जिसे उज्जैन का पारंपरिक 'नगर पूजन' कहा जाता है। इस दौरान शहर की सुरक्षा और खुशहाली के लिए विशेष अनुष्ठान किए गए।
🍷 कलेक्टर और एसपी ने की विशेष पूजा: 40 से अधिक देवी-भैरव मंदिरों में निकाली गई 27 किलोमीटर लंबी पारंपरिक यात्रा
उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह और पुलिस अधीक्षक (SP) प्रदीप शर्मा ने परंपरा का निर्वहन करते हुए देवी महामाया, महालया और शहर के अन्य भैरव मंदिरों में पहुंचकर मदिरा (शराब) का भोग लगाया और आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान माता को सोलह श्रृंगार, चुनरी और बलबाकल का भोग अर्पित किया गया। लगभग 12 घंटे और 27 किलोमीटर लंबी इस पैदल यात्रा में ढोल-नगाड़ों के साथ अधिकारी, पुजारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल रहे। यात्रा का समापन गढ़कालिका मंदिर के पास हांडी फोड़कर हुआ, जिसमें लगभग 31 बोतल शराब और 45 प्रकार की पूजन सामग्रियों का उपयोग किया गया।
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