रियासतकाल से चली आ रही छतरपुर की अनूठी रामलीला, 65 फीट ऊंचे रावण के पुतले में घूमेगा सिर और तलवार
छतरपुर में 129 साल पुरानी रामलीला और रावण दहन की परंपरा। इस बार 65 फीट ऊंचे हाई-टेक रावण का पुतला तैयार, सिर और तलवार घूमेंगे 90 डिग्री पर।
छतरपुर। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में विजयादशमी का पर्व और रावण दहन की परंपरा रियासतकाल से बेहद धूमधाम से चली आ रही है। महाराजा भवानी सिंह के शासनकाल और अंग्रेजों के दौर में उत्सव मनाने पर कड़ी बंदिशें थीं और लोगों में डर का माहौल रहता था, जिसके चलते वे छुपकर उत्सव मनाते थे। हालांकि, देश की आजादी के बाद लोगों का उत्साह खुलकर सामने आया और रावण दहन का आयोजन नए जोश के साथ शुरू हुआ। छतरपुर में रामलीला के आयोजन को 129 साल पूरे हो चुके हैं, और आज भी यहां की प्राचीन लालकड़क्का रामलीला समिति द्वारा महल परिसर में पारंपरिक रूप से मंचन किया जाता है, जिसमें स्थानीय लोग पूरी निष्ठा और निःशुल्क सहयोग से हिस्सा लेते हैं।
🤖 65 फीट ऊंचा हाई-टेक रावण, घूमेगा 90 डिग्री सिर और तलवार: पुतला तैयार करने में लगा 4 क्विंटल लोहा और एक महीने का वक्त
इस बार छतरपुर में बनने वाला रावण का पुतला अपने आकार और आधुनिक तकनीकों के कारण विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। कारीगरों ने इस विशाल 65 फीट ऊंचे रावण को ब्लैक ड्रेस में तैयार किया है, जिसके निर्माण में बांस, जूट, कपड़ा और करीब 4 क्विंटल लोहे का इस्तेमाल किया गया है। रावण के पुतले को खास और आकर्षक बनाने के लिए इसका सिर 90 डिग्री पर घूमेगा, साथ ही तलवार के साथ इसकी ढाल भी गतिमान रहेगी। पुतला इतना विशाल है कि इसके सिर को क्रेन की मदद से धड़ पर स्थापित करना पड़ा। स्थानीय कलाकारों की यह मेहनत और रावण दहन का यह भव्य आयोजन बुराई पर अच्छाई की जीत का अनूठा संदेश दे रहा है।
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