बुरहानपुर में 450 साल पुरानी परंपरा, विजयादशमी पर सातमुख वाले घोड़े पर सवार होकर निकले बड़े बालाजी महाराज
बुरहानपुर के अतिप्राचीन श्री बड़े बालाजी मंदिर में विजयादशमी पर निकली 450 साल पुरानी रथ यात्रा। सातमुख वाले घोड़े पर सवार होकर भगवान ने दिए दर्शन।
बुरहानपुर। जिले के महाजनापेठ स्थित अतिप्राचीन श्री बड़े बालाजी मंदिर में विजयादशमी के पावन अवसर पर 450 वर्ष से अधिक पुरानी ऐतिहासिक परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा के साथ जीवित है। इस परंपरा के तहत शहर के निर्धारित प्रमुख मार्गों से भगवान बालाजी महाराज की भव्य रथ यात्रा निकाली गई, जिसमें स्वयं भगवान भक्तों की दहलीज तक पहुंचकर उन्हें आशीर्वाद देते हैं। इस प्राचीन रथ में विराजमान होकर भगवान बालाजी ने शहरवासियों को अलौकिक दर्शन दिए, जिससे पूरा शहर भक्तिमय हो गया। मंदिर समिति के अध्यक्ष व पुजारी आशीष भगत ने बताया कि यह रथ यात्रा धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद खास है, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा और लोगों ने अपने आराध्य की आरती उतारकर सुख-समृद्धि की कामना की।
🐎 सातमुख वाले घोड़े पर सवार भगवान और 21 ब्राह्मणों द्वारा शमी पूजन: सोने के रूप में बांटी गई पत्तियां
इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि रथ में भगवान बालाजी महाराज सातमुख वाले घोड़े के वाहन पर विराजित होकर निकले, जिसके अद्भुत दर्शन साल में केवल एक बार ही मिलते हैं। यात्रा के दौरान एक भक्त के निवास पर 21 ब्राह्मणों के वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से शमी पूजन संपन्न हुआ। मंदिर से शुरू होकर यह रथ यात्रा पांडुमल चौराहा, गांधी चौक और फव्वारा चौक से होते हुए वापस मंदिर लौटी। मान्यताओं के अनुसार, विजयादशमी पर शमी के पत्तों को सोना मानकर भगवान के चरणों में अर्पित किया जाता है और लोग एक-दूसरे को 'सोना' (शमी की पत्तियां) भेंटकर आपसी प्रेम और खुशहाली का आशीर्वाद मांगते हैं।
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