मध्य प्रदेश के 4.5 लाख कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर, NPS की जगह UPS लागू करने की तैयारी में सरकार
मध्य प्रदेश सरकार 4.5 लाख कर्मचारियों के लिए UPS लागू करने पर विचार कर रही है। मनु श्रीवास्तव समिति दिसंबर में रिपोर्ट सौंपेगी, हालांकि कर्मचारी OPS की मांग पर अड़े हैं।
भोपाल। मध्य प्रदेश के 4 लाख 50 हजार से अधिक सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए पेंशन व्यवस्था को लेकर एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। राज्य में पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करने की लगातार उठ रही मांगों के बीच मध्य प्रदेश सरकार अब नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के अंतर्गत आने वाले कर्मचारियों को 'एकीकृत पेंशन योजना' यानी यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) का विकल्प देने पर गंभीरता से विचार कर रही है। केंद्र सरकार द्वारा 1 अप्रैल 2025 से लागू की गई इस योजना की तर्ज पर मध्य प्रदेश में इसके वित्तीय भार और प्रशासनिक पहलुओं का अध्ययन करने के लिए अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है, जो विभिन्न राज्यों की पेंशन व्यवस्था की स्टडी कर रही है।
📜 दिसंबर अंत तक आएगी समिति की रिपोर्ट: कर्मचारी संगठनों का रुख साफ—एनपीएस या यूपीएस नहीं, हमें चाहिए सिर्फ पुरानी पेंशन (OPS)
अगर प्रदेश में UPS लागू होती है, तो 25 साल की सेवा पूरी करने वाले रिटायर्ड कर्मचारियों को उनके आखिरी 12 महीनों के औसत मूल वेतन का 50% पेंशन के रूप में मिलेगा, जबकि कम से कम 10 साल की सेवा देने वालों को न्यूनतम 10,000 रुपये मासिक पेंशन दी जाएगी। इसके अतिरिक्त कर्मचारी की मृत्यु होने की स्थिति में पारिवारिक पेंशन का भी प्रावधान रहेगा। मनु श्रीवास्तव समिति इस साल दिसंबर के अंत तक अपनी रिपोर्ट मोहन यादव सरकार को सौंपेगी। वहीं दूसरी ओर, तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने स्पष्ट किया है कि कर्मचारी एनपीएस या यूपीएस के नाम पर किसी भ्रम में नहीं आने वाले हैं और वे लगातार पुरानी पेंशन योजना (OPS) की ही मांग करेंगे ताकि बुढ़ापे का सहारा पूरी तरह सुरक्षित रह सके।
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