कृषि विज्ञान केंद्र शहडोल में किसानों को मिला प्रशिक्षण, वैज्ञानिकों ने दिए मृदा स्वास्थ्य और जैविक खेती के टिप्स
कृषि विज्ञान केंद्र शहडोल में सिंगरौली के किसानों को प्राकृतिक खेती, उतेरा तकनीक और मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक उपयोग का वैज्ञानिक प्रशिक्षण दिया गया।
शहडोल। कृषि विज्ञान केंद्र शहडोल में किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग, जिला सिंगरौली के किसान दल ने शैक्षणिक भ्रमण कर खेती की आधुनिक तकनीकों के साथ-साथ जैविक एवं प्राकृतिक खेती की विधियों की जानकारी प्राप्त की। केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. मृगेंद्र सिंह के मार्गदर्शन में किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा परीक्षण, खरपतवार नियंत्रण और रबी फसलों की उन्नत किस्मों के बारे में विस्तार से समझाया गया। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि अधिक उत्पादन के चक्कर में खेतों में असंतुलित उर्वरकों का प्रयोग न करें, बल्कि मिट्टी की जांच के आधार पर ही बीजामृत, जीवामृत और नीमास्त्र जैसी प्राकृतिक विधियों को अपनाएं।
🥦 कम सिंचाई में अतिरिक्त मुनाफा देगी 'उतेरा खेती': जैविक कीटनाशकों से लागत घटाकर आय बढ़ाने पर वैज्ञानिकों का जोर
भ्रमण के दौरान कृषि वैज्ञानिक डॉ. बृजकिशोर प्रजापति ने सीमित सिंचाई वाले क्षेत्रों के लिए 'उतेरा खेती' को एक बेहतरीन विकल्प बताया। उन्होंने जानकारी दी कि वर्षा आधारित धान की कटाई से 10 से 15 दिन पहले ही खेत में बची नमी का उपयोग करते हुए अलसी, मसूर, मटरी और तिवड़ा का छिड़काव किया जा सकता है, जिससे किसानों को अतिरिक्त उपज मिलती है। इसके अलावा, सब्जी आधारित फसल चक्र अपनाने, रसचूसक कीटों के नियंत्रण के लिए 5% नीमगिरी अर्क और स्यूडोमोनास जैसे सूक्ष्मजीवों के उपयोग से खेती की लागत कम करने और किसानों की आय में वृद्धि करने के व्यावहारिक सुझाव दिए गए।
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