ईरान-मिडिल ईस्ट युद्ध का सड़क निर्माण पर असर, डामर के दाम दोगुने होने से रतलाम-झाबुआ हाईवे का काम अटका
ईरान और मिडिल ईस्ट युद्ध के कारण डामर के दाम दोगुने होकर 1 लाख रुपये प्रति मीट्रिक टन पहुंच गए हैं। इससे रतलाम में सड़क निर्माण और डामरीकरण के कार्य ठप हो गए हैं।
रतलाम। ईरान और मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और तनाव का असर अब केवल पेट्रोल, डीजल या गैस तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका सीधा प्रभाव सड़क निर्माण पर भी पड़ने लगा है। सड़क बनाने में उपयोग होने वाले डामर (Bitumen) के दाम पिछले 6 महीनों में लगभग दोगुने हो चुके हैं, जिससे सड़कों के डामरीकरण और नए निर्माण कार्य बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। रतलाम जिले को झाबुआ से जोड़ने वाले स्टेट हाईवे का निर्माण पिछले एक साल से चल रहा है, लेकिन डामर की बढ़ी हुई कीमतों के कारण इसका डामरीकरण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है।
💰 45 हजार से बढ़कर 1 लाख रुपये प्रति मीट्रिक टन पहुंचा भाव: ठेकेदारों ने एमपीआरडीसी से अनुबंध राशि रिवाइज करने की मांग की
पेट्रोलियम पदार्थों की बढ़ती कीमतों के चलते 6 महीने पहले जो डामर 45 से 55 हजार रुपये प्रति मीट्रिक टन मिल रहा था, वह अब बढ़कर 85 हजार से 1 लाख 2 हजार रुपये प्रति मीट्रिक टन तक पहुंच गया है। रतलाम नगर निगम में भी 21 नई सड़कों के भूमिपूजन के बावजूद काम अटका हुआ है, क्योंकि ठेकेदारों को भारी घाटे का सामना करना पड़ रहा है। निर्माण कंपनियों ने एमपीआरडीसी से डामर के बढ़े हुए रेट के अनुसार अनुबंध राशि रिवाइज करने की मांग की है, ताकि रुके हुए विकास कार्यों को गति मिल सके।
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