सागर में मानसून की बेरूखी से रबी सीजन पर संकट, कम पानी में गेहूं उगाने के लिए पुरानी 'कठिया' वैरायटी अपना रहे किसान

सागर जिले में मानसून की बेरूखी और पानी की कमी के चलते किसानों ने कम सिंचाई वाली गेहूं की किस्मों और 'कठिया' वैरायटी की ओर रुख करना शुरू कर दिया है।

Oct 25, 2026 - 16:16
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सागर में मानसून की बेरूखी से रबी सीजन पर संकट, कम पानी में गेहूं उगाने के लिए पुरानी 'कठिया' वैरायटी अपना रहे किसान

सागर। मध्य प्रदेश के सागर जिले में मानसून की बेरूखी ने इस बार रबी सीजन को लेकर किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। कम वर्षा के कारण सिंचाई परियोजनाओं के बांध, कुएं और बोरवेल जलस्तर के मामले में पिछड़ गए हैं, जिससे सिंचाई का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। किसानों को डर है कि यदि उन्होंने पारंपरिक रूप से अधिक पानी चाहने वाली गेहूं की फसल बो दी, तो भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। हालांकि, एमएसपी पर गेहूं बिकने के कारण किसान इसे छोड़ भी नहीं सकते, जिसके चलते अब कृषि विशेषज्ञों और प्रगतिशील किसानों की सलाह पर कम पानी में पकने वाली किस्मों की बुवाई की तैयारी की जा रही है।

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संकट की इस घड़ी में बुंदेलखंड के प्रगतिशील किसान आकाश चौरसिया ने पुरानी 'कठिया', 'प्रताप' और 'गोला' जैसी देसी वैरायटी अपनाने की सलाह दी है, जो बिना पानी या केवल एक-दो सिंचाई में भी अच्छा उत्पादन देती हैं। वहीं, कृषि विज्ञान केंद्र बिजौरा के प्रभारी डॉ. आशीष त्रिपाठी का कहना है कि सागर जिले में तीन लाख हेक्टेयर से अधिक में गेहूं बोया जाता है। पानी की कमी से निपटने के लिए किसान कम सिंचाई वाली किस्में जैसे सी-306, सुजाता, एचआई 1500, जे-डब्ल्यू-3211 और जे-डब्ल्यू-3020 का चयन कर सकते हैं। इसके अलावा खेतों में खुला पानी बहाने के बजाय स्प्रिंकलर (फव्वारा पद्धति) का उपयोग करने और 'हाइड्रोजिल' रसायन का प्रयोग करने की सलाह दी गई है।

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