विदेशी निवेशकों की रणनीति में बदलाव, ऑटो और कंज्यूमर स्टॉक्स बने निवेशकों की पहली पसंद

भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों (FPIs) ने ऑटो और फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर में खरीदारी बढ़ाई है। जानिए किन सेक्टरों में निवेश आया और कहां बिकवाली हुई।

Aug 21, 2026 - 18:17
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विदेशी निवेशकों की रणनीति में बदलाव, ऑटो और कंज्यूमर स्टॉक्स बने निवेशकों की पहली पसंद

भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) का रुझान अगस्त के पहले हिस्से में कुछ बदला हुआ नजर आ रहा है। खासतौर पर ऑटोमोबाइल सेक्टर में विदेशी निवेशकों ने एक बार फिर से खरीदारी में दिलचस्पी दिखाई है। एनएसडीएल (NSDL) के आंकड़ों पर आधारित एसबीआई सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त की पहली छमाही में FPIs ने अकेले ऑटो सेक्टर में 4,393 करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश किया है। इससे पहले जुलाई के महीने में विदेशी निवेशकों ने इस सेक्टर से लगभग 4,574 करोड़ रुपये निकाले थे, हालांकि पिछले पांच महीनों के कुल आंकड़ों को देखें तो इस सेक्टर से अभी भी बड़ी निकासी बनी हुई है।

📈 ऑटो सेक्टर में क्यों बढ़ी निवेशकों की दिलचस्पी और किन शेयरों में तेजी?

ऑटो सेक्टर में विदेशी निवेशकों की इस अचानक वापसी को बाजार में एक बड़ा सकारात्मक बदलाव माना जा रहा है। तकनीकी तौर पर देखें तो निफ्टी ऑटो इंडेक्स (Nifty Auto Index) पिछले लगभग तीन महीने तक एक सीमित दायरे में घूमने के बाद अब ऊपर की तरफ ब्रेकआउट दे चुका है। इस सकारात्मक माहौल के बीच बजाज ऑटो, बॉश, हीरो मोटोकॉर्प, महिंद्रा एंड महिंद्रा, मदरसन, सोना कॉमस्टार, टीवीएस मोटर और यूनो मिंडा जैसे प्रमुख शेयरों में मजबूती के संकेत मिल रहे हैं। इसके अलावा, ऐतिहासिक आंकड़े भी गवाह हैं कि सितंबर का महीना आमतौर पर ऑटो सेक्टर के लिए काफी अच्छा रहता है, क्योंकि पिछले 20 वर्षों में निफ्टी ऑटो इंडेक्स 16 बार सितंबर में बढ़त के साथ बंद हुआ है।

💰 फाइनेंशियल और कंज्यूमर स्टॉक्स बने पसंद, टेलीकॉम-पावर पर दबाव

ऑटो के अलावा अगस्त के शुरुआती पखवाड़े में विदेशी निवेशकों ने सबसे ज्यादा पैसा फाइनेंशियल सर्विस सेक्टर में लगाया, जहाँ करीब 6,950 करोड़ रुपये का निवेश आया। इसके अलावा कंज्यूमर सर्विसेज, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, हेल्थकेयर और आईटी सेक्टर में भी निवेशकों ने जमकर पैसा लगाया है, क्योंकि वे ऐसे स्थिर कारोबारों को चुन रहे हैं जहां बेहतर रिटर्न की उम्मीद हो। इसके विपरीत, टेलीकॉम और पावर सेक्टर में विदेशी निवेशकों की बिकवाली लगातार जारी है। 5G नेटवर्क, स्पेक्ट्रम के बड़े खर्च और ग्रीन एनर्जी से जुड़ी चुनौतियों के चलते इन सेक्टरों से निवेशकों ने दूरी बनाई है। कुल मिलाकर, FPIs अब चुनिंदा और मजबूत संभावनाओं वाले सेक्टरों में ही समझदारी से पैसा लगा रहे हैं।

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