विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा के नियमों को लेकर भ्रम, DPI की स्पष्ट सूची न आने से असमंजस

मध्य प्रदेश में अध्यापकों के लिए आयोजित होने वाली विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। डीपीआई की ओर से स्पष्ट निर्देश न आने से शिक्षक परेशान हैं।

Aug 22, 2026 - 10:46
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विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा के नियमों को लेकर भ्रम, DPI की स्पष्ट सूची न आने से असमंजस

मध्य प्रदेश में कार्यरत अध्यापकों के लिए विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के आवेदन की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। इसके बावजूद, स्कूल शिक्षा विभाग में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। परीक्षा की सारणी जारी होने के बाद भी लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) की ओर से यह स्पष्ट सूची उपलब्ध नहीं कराई गई है कि आखिरकार किन-किन शिक्षकों को इस परीक्षा में सम्मिलित होना अनिवार्य है और किन्हें छूट दी गई है, जिससे शिक्षकों में असमंजस का माहौल है।

❓ पात्रता नियमों में विरोधाभास और तकनीकी उलझन

विभाग की ओर से मौखिक रूप से यह कहा गया है कि जिनकी अंकसूची पर 'शिक्षक पात्रता परीक्षा' अंकित है, उन्हें इस प्रक्रिया से छूट रहेगी। हालांकि, साल 2005 से 2009 के दौरान व्यापम के माध्यम से नियुक्त शिक्षकों के प्रमाण-पत्रों पर 'संविदा शाला शिक्षक पात्रता परीक्षा' लिखा हुआ है, जिससे स्थिति और अधिक जटिल हो गई है। प्रशासनिक स्तर पर इस तकनीकी अंतर को लेकर अब तक कोई स्पष्ट लिखित दिशानिर्देश जारी नहीं किया जा सका है, जिसके कारण शिक्षक असमंजस में हैं।

⚠️ पाठ्यक्रम, पदोन्नति और प्रभार के पदों को लेकर उठे 3 प्रमुख सवाल

इस पूरी प्रक्रिया को लेकर शिक्षक संगठनों और शिक्षकों के सामने मुख्य रूप से तीन बड़े तकनीकी सवाल खड़े हो गए हैं:

  • पाठ्यक्रम का विवाद: शिक्षक संगठनों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करने से संबंधित हैं, न कि नए पाठ्यक्रम के तहत पुनः परीक्षा देने से। वर्ष 2005 से 2009 के बीच व्यापम द्वारा आयोजित कठिन परीक्षा के आधार पर ही संविदा शिक्षकों का चयन हुआ था, जिसका पाठ्यक्रम टीईटी के समान ही था।

  • पदोन्नत शिक्षकों की स्थिति: वर्ष 1999 से 2004 के बीच बिना किसी परीक्षा के नियुक्त हुए प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षक पदोन्नति पाकर अब उच्च पद पर कार्यरत हैं। उन्हें परीक्षा से मुक्त रखने की स्थिति में अन्य शिक्षकों के साथ असमानता का मुद्दा उठ रहा है।

  • प्रभार वाले पदों का पेंच: 'उच्च पद का प्रभार' नीति के अंतर्गत पदोन्नत होकर उच्च कक्षाओं को पढ़ा रहे शिक्षकों के लिए यह स्पष्ट नहीं है कि परीक्षा उनके मूल पद के आधार पर होगी या वर्तमान में संभाले जा रहे प्रभार वाले पद के अनुसार।

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