भोपाल की शिक्षक डॉ. अर्चना शुक्ला को मिलेगा राष्ट्रपति पुरस्कार, शिक्षा को दी नई दिशा
भोपाल की शिक्षिका डॉ. अर्चना शुक्ला का चयन राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2026 के लिए हुआ है। 5 सितंबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उन्हें सम्मानित करेंगी।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित सांदीपनि विद्यालय महात्मा गांधी की उच्च माध्यमिक शाला की शिक्षिका डॉ. अर्चना शुक्ला ने विज्ञान की पढ़ाई को किताबी दुनिया से बाहर निकालकर प्रकृति और समाज से जोड़ने का एक अनूठा और सराहनीय प्रयास किया है। उन्होंने अपने विद्यार्थियों के साथ मिलकर गौरैया संरक्षण (स्पैरो कंजर्वेशन), पेड़-पौधों की पहचान और बीज संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट तैयार किए हैं। खासकर गौरैया संरक्षण के लिए उनके द्वारा विकसित वैज्ञानिक मॉडल 'स्पैरो हाउस' को आज देश भर में भारी सराहना मिल रही है।
🇮🇳 राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू नई दिल्ली के विज्ञान भवन में करेंगी सम्मानित
विद्यार्थियों को शोध, नवाचार और परियोजना आधारित शिक्षा (Project-Based Learning) से जोड़ने के उनके इसी उत्कृष्ट योगदान को देखते हुए, उनका चयन 'राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2026' के लिए किया गया है। आगामी 5 सितंबर शिक्षक दिवस के अवसर पर नई दिल्ली के प्रतिष्ठित विज्ञान भवन में आयोजित होने वाले भव्य समारोह में देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा उन्हें सम्मानित किया जाएगा। इसके साथ ही, नेपाल में आयोजित 'कंजर्वेशन एशिया कांग्रेस-2026' में भी उन्होंने अपने छात्र-नेतृत्व वाले संरक्षण मॉडल को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रमुखता से प्रस्तुत किया है।
🌱 'प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग' से बच्चों में विकसित हो रही वैज्ञानिक सोच और नेतृत्व क्षमता
डॉ. शुक्ला का मानना है कि बच्चे केवल रटकर या किताबें पढ़कर विज्ञान न सीखें, बल्कि वे वास्तविक जीवन की समस्याओं को गहराई से समझें और उनके व्यावहारिक समाधान खोजें। इसी उद्देश्य के तहत उन्होंने अपने शिक्षण में 'प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग' को अपनाया है। उनके मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने पेड़ों की क्यूआर कोडिंग, स्पैरो कंजर्वेशन, 'सेव ए सीड-सेव ए ट्री' और प्लांट इमोशन जैसे शानदार प्रोजेक्ट तैयार किए हैं। इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों ने यह सीखा कि विज्ञान केवल परीक्षा में अच्छे अंक लाने का जरिया नहीं है, बल्कि इसके जरिए प्रकृति और समाज की गंभीर समस्याओं को सुलझाया जा सकता है। इन प्रोजेक्ट्स के दौरान बच्चों में वैज्ञानिक जिज्ञासा, नेतृत्व और समस्या-समाधान की अद्भुत क्षमता विकसित हुई है, और उनके इन कार्यों को जापान तथा नेपाल के अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी सराहा जा चुका है।
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