पुलिस प्रताड़ना और जमीन विवाद से परेशान लोगों ने की जान देने की कोशिश, मचा हड़कंप
टीकमगढ़ में जनविश्वास कार्यक्रम के दौरान न्याय न मिलने से परेशान दो लोगों ने जान देने की कोशिश की है। एक व्यक्ति को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले से एक बेहद चौंकाने वाली और सनसनीखेज खबर सामने आई है। यहाँ जनविश्वास और जनसंवाद कार्यक्रम के समापन के बाद जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मीडिया से रूबरू हो रहे थे, ठीक उसी दौरान अपनी शिकायतों का समाधान न होने और सुनवाई न किए जाने से आहत दो अलग-अलग लोगों ने आत्मघाती कदम उठाते हुए अपनी जान देने की कोशिश की। इस अचानक हुई घटना से कार्यक्रम स्थल के बाहर भारी हड़कंप मच गया। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने तुरंत स्थिति को संभालते हुए दोनों को बमुश्किल काबू में किया, जिसमें से एक व्यक्ति की गंभीर हालत को देखते हुए उसे तुरंत जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
👮 पुलिस प्रताड़ना से बेटे की मौत का आरोप लगाकर ड्राइवर ने उठाया खौफनाक कदम
घटना के संबंध में मिली जानकारी के मुताबिक, मचपुरा निवासी गंगू सेन पेशे से ड्राइवर हैं। उन्होंने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि करीब 11 साल पहले हुई चोरी की एक घटना के दौरान कोतवाली पुलिस ने उनके 13 वर्षीय मासूम बेटे को पकड़कर उसके साथ मारपीट की थी। आरोप है कि पुलिस की प्रताड़ना से तंग आकर उनके बेटे ने अपनी जान दे दी थी। तभी से वे उन दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें न्याय नहीं मिला। शुक्रवार को वे मुख्यमंत्री के सामने अपनी बात रखने और न्याय मांगने पहुँचे थे, लेकिन अंदर जाने न दिए जाने से क्षुब्ध होकर उन्होंने कार्यक्रम स्थल के बाहर यह खौफनाक कदम उठाया।
📜 जमीन का सीमांकन न होने से परेशान एक अन्य व्यक्ति ने भी की खुदकुशी की कोशिश
मुख्यमंत्री से मिलने की कोशिश करने वाले एक और शख्स ने भी इसी दौरान प्रशासनिक व्यवस्थाओं के खिलाफ कड़ा कदम उठाया। टीकमगढ़ के वार्ड क्रमांक 1 पुरानी टिहरी निवासी सचेंद्र कुशवाह अपनी पत्नी राधा और बेटी के साथ कार्यक्रम में पहुँचे थे। उनकी पत्नी राधा का कहना है कि उनकी कुल 1.096 एकड़ जमीन पर कुछ दबंगों ने अवैध कब्जा कर लिया है, और कई बार गुहार लगाने के बावजूद पटवारी जमीन का सीमांकन नहीं कर रहे हैं। सचेंद्र ने अपने मकान पर पाँच लाख रुपये का कर्ज भी ले रखा है। सीएम से मिलकर अपनी समस्या बताने से रोके जाने के बाद, निराश होकर उसने नगर पालिका दफ्तर के बाहर यह खतरनाक कदम उठाया। पुलिस ने तुरंत उसे टैक्सी से जिला अस्पताल पहुँचाया, जहाँ सिविल सर्जन डॉ. अमित शुक्ला के मुताबिक उसे कड़ी निगरानी में रखा गया है।
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