कूनो नदी पर पुल का सालों से इंतजार, जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को मजबूर सिलोरी-नवलपुरा के ग्रामीण
श्योपुर के सिलोरी और नवलपुरा गांव के ग्रामीण आजादी के दशकों बाद भी कूनो नदी पर पुल का इंतजार कर रहे हैं। स्वीकृति के 10 महीने बाद भी निर्माण कार्य ठप।
श्योपुर। देश को आजाद हुए दशकों बीत चुके हैं और इस दौरान केंद्र से लेकर प्रदेश तक कई सरकारें आईं और गईं। सत्तएँ बदलीं, जनप्रतिनिधि बदले, विकास के बड़े-बड़े दावे किए गए और ग्रामीण उत्थान की दर्जनों योजनाएं भी बनीं, लेकिन मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले की कराहल तहसील स्थित सिलोरी और नवलपुरा गांव के निवासियों की तकदीर नहीं बदली। कूनो नदी (Kuno River) के उफनते पानी के बीच से जान जोखिम में डालकर गुजरते ग्रामीणों की तस्वीरें आज भी प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत का अंतर बयां कर रही हैं।
🌉 75 परिवारों के लिए कूनो नदी बनी सबसे बड़ी बाधा: पुल के अभाव में थम जाता है जनजीवन
सिलोरी और नवलपुरा गांव के करीब 75 परिवारों के लिए कूनो नदी सिर्फ एक जलधारा नहीं, बल्कि उनकी रोजमर्रा की जिंदगी के बीच खड़ी एक बहुत बड़ी मुसीबत बन चुकी है।
नदी पर पुल (Bridge) न होने के कारण ग्रामीणों को अपनी दैनिक जरूरतों के लिए हर दिन नदी के गहरे पानी को पार करना पड़ता है या फिर कई किलोमीटर का खतरनाक वैकल्पिक रास्ता तय करना पड़ता है। बारिश के दिनों में जब कूनो नदी का जलस्तर बढ़ता है, तब इन गांवों का संपर्क मुख्य मार्ग से पूरी तरह कट जाता है।
⏳ स्वीकृति मिलने के 10 महीने बाद भी निर्माण ठप: कागजों में सिमट कर रह गया कूनो नदी का पुल
ग्रामीणों के अनुसार, करीब 10 महीने पहले प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने भरोसा दिलाया था कि कूनो नदी पर पुल के निर्माण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और जल्द ही काम शुरू कर दिया जाएगा।
लेकिन धरातल पर आज तक एक ईंट भी नहीं रखी जा सकी। ग्रामीणों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी थी, तो फिर निर्माण कार्य किस स्तर पर और किसके दबाव में अटका हुआ है?
🏥 इलाज, राशन और बच्चों की पढ़ाई पर गहरा संकट: हाईवे तक पहुंचना हुआ मुश्किल
पुल न होने का सीधा असर गांव के सामाजिक और आर्थिक जीवन पर पड़ रहा है।
ग्रामीणों को खाद्यान्न (राशन) लाने, आपातकालीन चिकित्सा स्थिति में मरीज को अस्पताल पहुंचाने, बच्चों को स्कूल भेजने और खेती-किसानी के सामान के लिए काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। यदि नदी पर पुल बन जाता है तो इन गांवों का सीधा संपर्क 'शिवपुरी-श्योपुर राज्य राजमार्ग' से हो जाएगा, जिससे सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित हो सकेगा।
💡 पुल के साथ-साथ सड़क और बिजली व्यवस्था भी बदहाल: ग्रामीणों ने सरकार के खिलाफ जताई नाराजगी
गांव की समस्याएं केवल पुल तक ही सीमित नहीं हैं।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत गांव तक पहुंचने वाली पक्की सड़क का काम भी महीनों से अधूरा पड़ा हुआ है। इसके अलावा, गांव में बिजली के खंभे और ट्रांसफार्मर लगाने के बावजूद अक्सर बिजली ठप रहती है। ग्रामीण दयाराम गुर्जर ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि अब ग्रामीणों को झूठे आश्वासन नहीं, बल्कि कूनो नदी पर जमीन पर बनता हुआ पुल चाहिए।
🚨 एसडीएम ने लिया संज्ञान: संबंधित विभागों के अधिकारियों को तलब करने का दिया आश्वासन
मामले में लगातार उठ रहे सवालों के बीच कराहल के अनुविभागीय अधिकारी (SDM) बी.एस. श्रीवास्तव ने कड़ा रुख अपनाया है।
एसडीएम बी.एस. श्रीवास्तव ने बताया कि वे आज ही प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) और विद्युत विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा करेंगे। उन्होंने आश्वस्त किया है कि स्वीकृत पुल का निर्माण कार्य अब तक क्यों शुरू नहीं हुआ और बिजली की समस्या क्यों बनी हुई है, इसकी समीक्षा कर जल्द से जल्द काम शुरू कराया जाएगा।
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