दशलक्षण पर्व में छिपा है न्यूरोसाइंस का रहस्य! IIT विज्ञानी से जानें उपवास और आत्मशुद्धि का विज्ञान

जैन धर्म के पवित्र दशलक्षण (पर्युषण) महापर्व की देश-दुनिया में धूम! जानें 10 उत्तम गुणों, आत्मशुद्धि के उपाय, और इसके पीछे छिपे न्यूरोसाइंस व वैज्ञानिक महत्व को।

Sep 24, 2026 - 20:43
0
दशलक्षण पर्व में छिपा है न्यूरोसाइंस का रहस्य! IIT विज्ञानी से जानें उपवास और आत्मशुद्धि का विज्ञान

सागर। जैन धर्मावलंबियों का परम पवित्र 'दशलक्षण (पर्युषण) महापर्व' इन दिनों मध्य प्रदेश सहित देश और दुनिया भर में पूरी श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। जैन दर्शन में पर्युषण पर्व को आत्मशुद्धि, संयम, तप और गहन धर्म-साधना का सबसे महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। यह पर्व केवल बाह्य उत्सव या नाच-गाने का माध्यम नहीं है, बल्कि अपने अंतर्मन में झांकने, इच्छाओं पर नियंत्रण पाने और आत्मा पर लगे पुरातन कर्मों की निर्जरा करने का एक महान अवसर है।

📜 भाद्रपद मास में क्यों मनाया जाता है दशलक्षण पर्व: 'उत्तम क्षमा' से होती है नए जीवन की शुरुआत

विशेष रूप से दिगंबर जैन संप्रदाय दस दिनों के इस महापर्व को विशेष व्रत और नियमों के साथ मनाता है।

तीर्थंकर ऋषभदेव जैन विद्वत महासंघ के राष्ट्रीय मंत्री डॉ. संजीव सराफ के अनुसार, यह पर्व वैसे तो वर्ष में तीन बार आता है, लेकिन भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी से चतुर्दशी तक मनाया जाने वाला पर्व सर्वाधिक मुख्य माना जाता है। प्रलयकाल के बाद भाद्रपद में नवीन जीवन के आरंभ की मान्यता है। इस पर्व का पहला और अंतिम दिन 'उत्तम क्षमा' का होता है। इसमें जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए दूसरों से क्षमा मांगी जाती है और दूसरों को सहर्ष क्षमा किया जाता है, जो भारतीय संस्कृति के "जियो और जीने दो" तथा "वसुधैव कुटुंबकम" के संदेश को चरितार्थ करता है।

🥗 आत्म कल्याण और अहिंसक आहार का नियम: आलू-प्याज व कंदमूल का होता है पूर्ण त्याग

जिनवाणी संरक्षण और प्रबंधन समिति की राष्ट्रीय संयोजक दीपाली जैन ने बताया कि दशलक्षण पर्व में आत्मा को पवित्र करने वाले 10 लक्षणों (उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौच, सत्य, संयम, तप, त्याग, आकिंचन्य और ब्रह्मचर्य) को धारण किया जाता है।

इन दस दिनों में श्रावक-श्राविकाएं एकासन या निर्जला उपवास करते हैं। बाहरी खानपान का पूरी तरह त्याग कर केवल अहिंसक और सात्विक भोजन ग्रहण किया जाता है। आलू, प्याज, लहसुन और हरी सब्जियों का त्याग कर भगवान महावीर स्वामी के "अहिंसा परमोधर्म" के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया जाता है।

🧠 दशलक्षण पर्व का वैज्ञानिक व मनोवैज्ञानिक पक्ष: न्यूरोसाइंस और आत्म-नियंत्रण से गहरा नाता

आईआईटी रुड़की के वरिष्ठ भौतिक विज्ञानी प्रो. अशोक कुमार जैन के अनुसार, 'तत्वार्थ सूत्र' में वर्णित दस लक्षणों की वैचारिक परंपरा 2 हजार वर्ष से भी अधिक प्राचीन है।

प्रो. जैन का मानना है कि यह केवल एक प्राचीन पर्व नहीं बल्कि 'शाश्वत पर्व' है, क्योंकि इसका सीधा संबंध मनुष्य के अंतर्मन से है। आधुनिक मनोविज्ञान (Psychology) और न्यूरोसाइंस (Neuroscience) में भी आत्म-जागरूकता, संवेग नियंत्रण (Emotional Regulation) और चेतना के संयम को मानव व्यवहार के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। उपवास का अर्थ केवल अन्न छोड़ना नहीं, बल्कि इच्छाओं का स्वामी बनना है। आज वैश्विक स्तर पर जो हिंसा और तनाव दिख रहा है, उसका समाधान यह पर्व भीतर से शुरू करता है।

🕊️ टीकमगढ़ और सागर के मंदिरों में उमड़ रही भीड़: तत्वार्थ सूत्र वाचन और महाआरती से भक्तिमय माहौल

मध्य प्रदेश के सागर, टीकमगढ़, दमोह, छतरपुर सहित विभिन्न जिलों और विदेशों में बसे जैन समाज के लोग इस पर्व को मना रहे हैं।

जैन विद्वान पंडित बृजेश कुमार शास्त्री ने बताया कि इन दिनों सुबह से ही जिनालयों में पूजा-विधान, अभिषेक और पवित्र ग्रंथराज 'तत्वार्थ सूत्र' का वाचन किया जाता है। संध्या काल में जिनेन्द्र देव की महाआरती और सांस्कृतिक-धार्मिक सभाएं आयोजित होती हैं, जिससे समूचा वातावरण भक्ति और अध्यात्म के रंग में रंगा हुआ नजर आ रहा है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User