बेतवा के दर्शन मात्र से टलती है अकाल मृत्यु! विदिशा में शुरू हुआ 16 दिन का तर्पण-पिंडदान
विदिशा के बेतवा नदी (बड़वाले घाट) पर पितृ पक्ष की शुरुआत के साथ ही तर्पण और पिंडदान के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। जानें यहां पिंडदान का धार्मिक महत्व।
विदिशा: आज शनिवार से पितृ पक्ष शुरू हो गया है। भाद्रपद पूर्णिमा की सुबह से ही विदिशा के अशोक नगर मार्ग पर बेतवा नदी वाले बड़वाले घाट पर लोगों की अच्छी-खासी भीड़ देखने को मिल रही है। सुबह 4-5 बजे के अंधेरे से ही लोग घाट पर पहुंचने लगे हैं और जैसे-जैसे दिन निकल रहा है, तर्पण और पिंडदान करने वालों का आना लगातार जारी है। घाट पर पंडितों की मौजूदगी में लोग हाथ में जल, कुशा और काले तिल लेकर अपने पूर्वजों को याद कर रहे हैं और उनके नाम का तर्पण कर रहे हैं। पूरे घाट पर मंत्रों की आवाज गूंज रही है और माहौल पूरी तरह धार्मिक बना हुआ है।
🌊 बेतवा के दर्शन से अकाल मृत्यु के डर से मिलती है मुक्ति
बड़वाले घाट के पंडित राजेंद्र दुबे ने बताया कि, ''आज पूर्णिमा से शुरू हुआ यह सिलसिला पूरे 16 दिन यानी अमावस्या तक चलेगा। इन दिनों पितृ धरती पर आते हैं।'' उन्होंने बेतवा नदी की मान्यता बताते हुए कहा कि, ''यह वही पावन तट है, जहां कभी भगवान श्रीराम के चरण पड़े थे। महाकवि कालिदास जी ने भी अपनी किताब में इस जगह की सुंदरता और पवित्रता की तारीफ की है। माना जाता है कि कलयुग में बेतवा के दर्शन करने और इसमें स्नान करने मात्र से ही इंसान को हर तरह की परेशानियों और अकाल मृत्यु के डर से मुक्ति मिल जाती है।''
👨👩👧👦 महिलाएं और बच्चे भी कर सकते हैं पितरों का तर्पण
पंडित राजेंद्र दुबे ने इस बात पर भी जोर दिया कि, आजकल के दौर में युवाओं को भी अपनी इस परंपरा को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि, ''पितरों का तर्पण सिर्फ कोई एक इंसान नहीं, बल्कि घर के सभी लोग चाहे पुरुष हों, महिलाएं हों या बच्चे, सब मिलकर कर सकते हैं। जैसे रामायण काल में माता सीता ने भी राजा दशरथ के लिए पिंडदान किया था। पूर्वजों का आशीर्वाद मिलने से घर में सुख-शांति और बरकत बनी रहती है।''
🙏 घर आकर परिवार को आशीर्वाद देते हैं पितृ
बता दें कि, हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का बहुत अधिक महत्व है। परंपरा के अनुसार, पितृ पक्ष में घर के दरवाजे पर चरण बनाए जाते हैं। मान्यता है कि पितृ पक्ष में पूर्वज धरती लोक पर आते हैं और इन्हीं चरणों के माध्यम से घर में प्रवेश करते हैं और परिवार को आशीर्वाद देते हैं। इससे सभी के कष्ट दूर होते हैं और घर में शांति बनी रहती है। फिलहाल बेतवा घाट पर लोगों की आवाजाही बनी हुई है और पूजन-तर्पण का काम लगातार चल रहा है।
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