दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ने वाला बाजार बनेगा भारत, आरएसी और इलेक्ट्रॉनिक्स की बढेगी मांग
बीसीजी और सीआईआई की रिपोर्ट के अनुसार भारत का कंज्यूमर ड्यूरेबल्स बाजार 2030 तक 3 लाख करोड़ पार कर सकता है।
भारत में कंज्यूमर ड्यूरेबल्स प्रोडक्ट्स का मार्केट साल 2030 तक बढ़कर 3 से 3.25 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान जताया गया है. बॉस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (BCG) और उद्योग मंडल भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) की एक संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, इससे घरेलू स्तर पर सामग्री और कलपुर्जों के विनिर्माण में 40,000 से 50,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त वैल्यू-एडिशन का शानदार अवसर पैदा होगा. रिपोर्ट में कहा गया है कि अगले पांच वर्षों में भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ने वाले कंज्यूमर ड्यूरेबल्स बाजारों में अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखेगा.
🏭 2. लोकल लेवल पर प्रोडक्शन बढ़ाने की जरूरत, आरएसी और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में दिख रहा बड़ा अंतर
कंज्यूमर ड्यूरेबल्स कैटेगरी में उत्पादों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले पार्ट्स और मटीरियल की लिस्ट (बिल ऑफ मटीरियल्स) का स्थानीय स्तर पर उत्पादन अभी 25% से 70% के बीच है. टेलीविजन और एयर-कंडीशनर जैसे उत्पादों में लोकल मैन्युफैक्चरिंग कम है, जबकि रेफ्रिजरेटर और वॉशिंग मशीन में यह स्थिति बेहतर है. रिपोर्ट में चेताया गया है कि यदि घरेलू स्तर पर कलपुर्जे बनाने की क्षमता में तेजी नहीं लाई गई, तो इस बढ़ते अवसर का एक बड़ा हिस्सा आयात (इंपोर्ट) के जरिए ही पूरा होता रहेगा.
🚀 3. ग्लोबल एक्सपोर्ट में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने और आरएंडडी पर खर्च की सख्त जरूरत
ग्लोबल कंज्यूमर ड्यूरेबल्स एक्सपोर्ट के 2030 तक 900-950 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है, लेकिन वैश्विक व्यापार में वर्तमान में भारत की हिस्सेदारी 1% से भी कम है और हमारा एक्सपोर्ट मुख्य रूप से पड़ोसी देशों तक ही सीमित है. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की शीर्ष कंज्यूमर ड्यूरेबल्स कंपनियां अपने रेवेन्यू का 1% से भी कम हिस्सा रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) पर खर्च करती हैं, जबकि वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा 1 से 4% तक है. भारत को वैश्विक बाजार में मुकाबला करने के लिए इनोवेशन, टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप और स्थानीय विनिर्माण पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है.
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