गुना में खाद संकट पर गरमाई सियासत, ई-टोकन सिस्टम सुधरा नहीं तो होगा उग्र आंदोलन
गुना में खाद के ई-टोकन सिस्टम और कालाबाजारी से परेशान किसानों ने दी आंदोलन की चेतावनी। जानिए फतेहगढ़ कृषि मंडी बैठक और कांग्रेस के पैदल मार्च की पूरी खबर।
गुना : खाद के ई-टोकन सिस्टम ने किसानों की नींद उड़ा रखी है। अब रबी की फसल के लिए खाद की चिंता किसानों को सताने लगी है। इसी को देखते हुए फतेहगढ़ कृषि मंडी में किसानों ने बैठक की। इसमें खाद के ई-टोकन जैसी समस्याओं को लेकर चर्चा की गई। खाद संकट को लेकर किसानों में काफी आक्रोश देखने को मिला। किसानों ने अपनी मांगें उठाकर जिला प्रशासन को कड़ी चेतावनी दी है।
⚠️ ई-टोकन सिस्टम से हो रही हैं गंभीर दिक्कतें
किसानों का कहना है "अगर खाद के ई-टोकन सिस्टम में 01 अक्टूबर से सुधार नहीं किया तो पूरे जिले में आंदोलन शुरू किया जाएगा।" किसानों के लिए ई-टोकन प्रणाली गंभीर समस्या है। ऑनलाइन बुक नहीं हो पाने के कारण किसान खाद से वंचित रह जाते हैं। कहीं रिटेलर पोर्टल में शो नहीं करता तो कहीं बुक करने में सबमिट का ऑप्शन नहीं आता। किसानों को अभी तक खाद उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। किसान नेता संजीव कुमार आर्य का कहना है "किसानों की मांगों को लेकर प्रशासन गंभीर नहीं है।"
🔍 खाद की कालाबाजारी का लग रहा है गंभीर आरोप
बमोरी तहसील में पहले भी कई बार किसानों ने इस मुद्दे को उठाया है और कई गंभीर आरोप लगाए हैं। खाद की कालाबाजारी को लेकर भी कुछ दिन पहले जिला प्रशासन ने एक दुकानदार की दुकान सील कर दी थी, जिसकी दुकान में स्टॉक से ज्यादा खाद पाई गई थी। किसानों ने आरोप लगाया "बड़े खाद विक्रेताओं ने अपने गोदाम में खाद का स्टॉक कर रखा है और ऊंचे दामों में बेच रहे हैं। किसान ई-टोकन के चक्कर में कई दिन तक घूमता रहता है।"
✊ किसानों के समर्थन में उतरी कांग्रेस पार्टी
गुना में खाद के ई-टोकन सिस्टम को लेकर अब कांग्रेस ने भी मोर्चा खोल दिया है। 30 सितंबर को कांग्रेस किसानों के साथ पैदल मार्च करेगी। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि गुना में मक्का, सोयाबीन न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी सुनिश्चित करने तथा खाद वितरण में कालाबाजारी व ई-टोकन व्यवस्था के विरोध में पैदल मार्च हनुमान चौराहा गुना से जिला कलेक्टर परिसर तक दोपहर 12 बजे निकाला जाएगा।
📢 किसानों की प्रशासन से प्रमुख मांगें
किसानों का कहना है कि वे गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक करेंगे। किसानों ने मांग की है कि ई-टोकन व्यवस्था को सरल एवं सुगम बनाया जाए। रैक से प्राप्त संपूर्ण डीएपी (DAP) के स्टॉक को एक बार में ही ई-टोकन प्रणाली में दर्ज किया जाए। बमोरी क्षेत्र में पर्याप्त डीएपी (DAP) उपलब्ध कराई जाए।
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