कान्हा टाइगर रिजर्व में मिला 11 माह की बाघिन का शव, आपसी संघर्ष में मौत की आशंका

मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में 11 माह की बाघिन का शव मिलने से हड़कंप मच गया है। वहीं शिवपुरी में तेंदुए के शिकार के मामले में वाइल्डलाइफ SOS के संचालक से एसटीएफ ने लंबी पूछताछ की है।

Sep 29, 2026 - 13:40
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कान्हा टाइगर रिजर्व में मिला 11 माह की बाघिन का शव, आपसी संघर्ष में मौत की आशंका

मध्य प्रदेश के दो अलग-अलग जिलों से वन्यजीवों से जुड़ी दो बड़ी और अहम खबरें सामने आई हैं। मंडला जिले के विश्व प्रसिद्ध कान्हा टाइगर रिजर्व में एक बाघिन का शव बरामद किया गया है। बीती 28 सितंबर की सुबह जब वन विभाग का गश्ती दल जंगल में रूटीन गश्त पर निकला था, तब उन्हें यह शव दिखाई दिया। सूचना मिलते ही अधिकारियों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर शव को अपने कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के साथ-साथ फॉरेंसिक जांच के लिए जरूरी नमूने भी सुरक्षित एकत्र कर लिए हैं।

🔍 नक्तीघाटी बीट में मिले खून के निशान और फुटप्रिंट, डॉग स्क्वाड से कराई गई जांच

कान्हा टाइगर रिजर्व के सहायक संचालक प्रकाश वर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि 28 सितंबर की सुबह जब गश्त दल नक्तीघाटी बीट के कक्ष क्रमांक 138 से गुजर रहा था, तो उन्हें वहां बाघ के फुटप्रिंट और खून के ताजे निशान दिखाई दिए। इसके बाद आसपास के पूरे इलाके की बारीकी से छानबीन की गई, जहां एक मृत बाघिन शावक का शव बरामद हुआ। वरिष्ठ अधिकारियों ने तत्काल घटनास्थल की घेराबंदी कर डॉग स्क्वाड की मदद से गहन जांच-पड़ताल कराई।

🩺 वन्यजीव विशेषज्ञों ने किया परीक्षण, शरीर पर मिले अन्य जानवर से संघर्ष के निशान

वरिष्ठ वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संदीप अग्रवाल और पशु चिकित्सक डॉ. ललित चौरसिया के विशेषज्ञ दल ने मृत बाघ शावक का विधिवत पोस्टमार्टम किया। इस परीक्षण में शावक की उम्र लगभग 11 महीने और उसका लिंग मादा पाया गया है। शावक के शरीर पर किसी अन्य वन्यजीव के साथ हुए खूनी संघर्ष के स्पष्ट निशान और गहरी चोटें मिली हैं। प्रारंभिक जांच के आधार पर विशेषज्ञों ने यह संभावना जताई है कि इस बाघिन की मौत आपसी संघर्ष के कारण हुई है।

🕵️‍♂️ शिवपुरी में तेंदुए के शिकार मामले में वाइल्डलाइफ SOS के संचालक से 9 घंटे लंबी पूछताछ

दूसरी तरफ, शिवपुरी जिले में तेंदुए के शिकार से जुड़े एक बेहद संवेदनशील मामले में नया मोड़ आ गया है। इस प्रकरण को लेकर वाइल्डलाइफ एसओएस (Wildlife SOS) एनजीओ के संचालक कार्तिक सत्यनारायण से सोमवार को वन प्रशासन के विशेष कार्य बल (STF) के कार्यालय में लंबी पूछताछ की गई। यह पूछताछ सुबह 11:00 बजे शुरू होकर रात 8:30 बजे तक यानी लगातार साढ़े 9 घंटे तक चली, जिसमें वन्यजीव संरक्षण और हालिया शिकार के मामलों को लेकर कई गंभीर सवाल-जवाब किए गए।

⚖️ कार्तिक सत्यनारायण ने आरोपों को बताया बेबुनियाद, सुप्रीम कोर्ट के वकील ने दी सफाई

लंबे समय तक चली पूछताछ के बाद बाहर आए कार्तिक सत्यनारायण ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें पूरी तरह बेबुनियाद और एक गहरी साजिश करार दिया। कार्तिक ने कहा कि उनके संगठन का कोई भी कर्मचारी कानून के खिलाफ जाकर कोई कार्य नहीं कर सकता। उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वे पिछले 30 वर्षों से लगातार वन्यजीवों की रक्षा के नेक कार्य में समर्पित हैं। उनके साथ मौजूद सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील रोहित भारद्वाज ने भी स्पष्ट किया कि वे जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं और एसटीएफ जब भी बुलाएगी, वे पेश होंगे। फिलहाल वन विभाग और एसटीएफ की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

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