टेकनपुर के नेशनल डॉग ट्रेनिंग सेंटर में भूटान और देश के अन्य राज्यों के श्वान ले रहे हैं विशेष प्रशिक्षण
ग्वालियर की बीएसएफ अकादमी टेकनपुर स्थित राष्ट्रीय श्वान प्रशिक्षण केंद्र में भूटान और देश के कई राज्यों के सुरक्षा बलों के कुत्तों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।
मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में स्थित सीमा सुरक्षा बल (BSF) अकादमी टेकनपुर का राष्ट्रीय श्वान प्रशिक्षण केंद्र अब केवल देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुका है। वर्तमान में यह प्रतिष्ठित केंद्र देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ अब विदेशी सुरक्षा बलों के श्वानों (कुत्तों) को भी उच्चस्तरीय और आधुनिक प्रशिक्षण प्रदान कर रहा है, जिससे सुरक्षा तंत्र को और अधिक मजबूती मिल रही है।
🇧🇹 भूटान के बेल्जियन मेलिनोइस कुत्ते ले रहे हैं प्रशिक्षण, साथ आए हैंडलर भी सीख रहे हैं गुर
इस केंद्र की ख्याति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इन दिनों यहां पड़ोसी देश भूटान के सुरक्षा बलों के बेहतरीन 'बेल्जियन मेलिनोइस' नस्ल के कुत्ते कड़ा प्रशिक्षण ले रहे हैं। खास बात यह है कि उनके साथ आए विदेशी हैंडलर भी बीएसएफ के विशेष विशेषज्ञों से आधुनिक प्रशिक्षण के गुर सीख रहे हैं। इसके अलावा पंजाब और उत्तर प्रदेश पुलिस के श्वान दल भी वर्तमान में यहां प्रशिक्षणरत हैं। देश भर में बीएसएफ अकादमी ही इकलौती ऐसी जगह है जहां इस तरह का उच्चस्तरीय राष्ट्रीय श्वान प्रशिक्षण केंद्र संचालित किया जा रहा है।
💣 नारकोटिक्स से लेकर बम डिटेक्शन तक, विभिन्न विधाओं में निपुण बनाए जाते हैं श्वान
इस प्रशिक्षण केंद्र में कुत्तों को उनकी उपयोगिता और सुरक्षा बलों की खास जरूरतों के आधार पर अलग-अलग विधाओं में प्रशिक्षित किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से विस्फोटक (बम) डिटेक्शन, मादक पदार्थों (नारकोटिक्स) की पहचान, ट्रैकिंग और वीआईपी सुरक्षा शामिल हैं। सुरक्षा बलों की मांग के अनुरूप विभिन्न नस्लों के श्वानों को विशेष पाठ्यक्रम के तहत तैयार किया जाता है। भूटान, पंजाब और उत्तर प्रदेश के अलावा देश के कई अन्य राज्यों के कुत्ते भी पूर्व में यहां से प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं।
🧬 केंद्र में संचालित हो रहा है विशेष प्रजनन केंद्र, देसी नस्लों को बढ़ावा देने पर भी जोर
राष्ट्रीय श्वान प्रशिक्षण केंद्र के परिसर में ही एक आधुनिक प्रजनन (ब्रीडिंग) केंद्र भी संचालित किया जा रहा है। यहां देसी और विदेशी दोनों प्रकार की नस्लों के कुत्तों का वैज्ञानिक तरीके से प्रजनन कराया जाता है। जन्म के शुरुआती दिनों से ही पिल्लों की देखरेख इस प्रकार की जाती है कि वे भविष्य में सुरक्षा बलों की विभिन्न प्रशिक्षण विधाओं में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के योग्य बन सकें। इसके साथ ही, केंद्र में भारतीय (देसी) नस्ल के कुत्तों की संख्या बढ़ाने और उन्हें सुरक्षा कार्यों में सक्षम बनाने के लिए भी विशेष कार्य किए जा रहे हैं।
📦 मादक पदार्थों की पहचान के प्रशिक्षण की सबसे ज्यादा मांग, नारकोटिक्स डिटेक्शन के लिए हो रहे तैयार
प्रशिक्षण केंद्र के जानकारों के मुताबिक, वर्तमान समय में यहां सबसे अधिक मांग मादक पदार्थों (नारकोटिक्स) की पहचान और डिटेक्शन का प्रशिक्षण देने की आ रही है। पंजाब और उत्तर प्रदेश पुलिस के कुत्तों में भी इस विशेष विधा का प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले श्वानों की संख्या सबसे अधिक है। देश-विदेश के सुरक्षा बलों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विदेशी और देसी दोनों ही नस्लों के कुत्तों को इस चुनौतीपूर्ण कार्य के लिए पूरी मुस्तैदी से तैयार किया जा रहा है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)