साध्वी हर्षा का संतों पर तीखा हमला, रामायण फिल्म में अंजलि अरोड़ा के सीता बनने पर संतों की चुप्पी पर उठाए सवाल

उज्जैन की साध्वी हर्षा रिछारिया ने फिल्म में अंजलि अरोड़ा को माता सीता का किरदार मिलने और संतों की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दोहरे रवैये का आरोप लगाया।

Sep 30, 2026 - 15:44
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साध्वी हर्षा का संतों पर तीखा हमला, रामायण फिल्म में अंजलि अरोड़ा के सीता बनने पर संतों की चुप्पी पर उठाए सवाल

मध्य प्रदेश के धार्मिक नगरी उज्जैन से एक नया और तीखा विवाद सामने आया है। साध्वी हर्षा रिछारिया ने सोशल मीडिया पर वीडियो और पोस्ट जारी कर देश के कुछ प्रमुख संतों और धर्मगुरुओं के रवैये पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि हर्षा ने अपने बयान में सीधे तौर पर किसी अभिनेत्री का नाम नहीं लिया, लेकिन आने वाली फिल्म और उसमें माता सीता के किरदार को लेकर उन्होंने संतों को सीधी चुनौती दी है। दरअसल, यह पूरा मामला फिल्म 'महाकाव्य श्री रामायण कथा श्री राम की' से जुड़ा है, जिसमें 'कच्चा बादाम' गाने से सोशल मीडिया पर वायरल हुई अभिनेत्री अंजलि अरोड़ा माता सीता का किरदार निभा रही हैं।

🎭 'मुझे नचनिया और पाखंडी कहा गया', हर्षा बोलीं- मेरे संन्यास पर आपत्ति थी तो अब सीता के किरदार पर चुप्पी क्यों?

साध्वी हर्षा ने अपने वीडियो संदेश में खुलकर अपनी बात रखते हुए कहा कि कुछ संतों ने शुरुआत से ही उनके हर कदम पर सवाल उठाए और उन्हें कथित तौर पर 'नचनिया', 'पाखंडी' तथा सनातन धर्म को बदनाम करने वाली तक करार दिया था। हर्षा का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि जो लोग सनातन धर्म के अपमान के खिलाफ मुखर होकर आवाज उठाते हैं, वे हर मामले में एक ही पैमाना अपनाएंगे, लेकिन यहां स्थिति बिल्कुल उल्टी है। उन्होंने सवाल किया कि जिन संतों को उनके संन्यास, अध्यात्म और धर्म के मार्ग पर चलने से आपत्ति थी, वही संत आज ऐसी फिल्म के प्रचार-प्रसार या समर्थन में नजर आ रहे हैं, जिसमें क्लबों में डांस करने वाली अभिनेत्री माता सीता का किरदार निभा रही है।

🔍 अंजलि अरोड़ा की ओर इशारा, हर्षा बोलीं- क्या लोग मां सीता को अभिनेत्री के स्तर पर समझ रहे हैं या अभिनेत्री को?

अपने वीडियो में हर्षा ने बिना नाम लिए 'कच्चा बादाम' फेम अंजलि अरोड़ा पर निशाना साधा, जो सितंबर 2026 में आ रही रामायण आधारित फिल्म में सीता की भूमिका निभा रही हैं। हर्षा ने तीखे शब्दों में कहा कि यदि उनके पुराने काम और सोशल मीडिया एक्टिविटी को आधार बनाकर उन्हें सनातन विरोधी ठहराया जा सकता है, तो फिर इस मामले में वही सवाल क्यों नहीं उठाए जा रहे? उन्होंने संतों के इस दोहरे रवैये को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि क्या लोग मां सीता को इस स्तर पर समझ रहे हैं या फिर अभिनेत्री को मां सीता के स्तर पर तौला जा रहा है? उन्होंने कुछ संतों की चुप्पी को लेकर कथित दोगलेपन की बात कही और स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति के अतीत या पेशे को उसके धार्मिक किरदार का आधार बनाया जाता है, तो यह नियम हर किसी के लिए समान होना चाहिए।

💬 मंच संचालन और लाइमलाइट पर भी रखी बात, अंजलि अरोड़ा का पक्ष भी आ चुका है सामने

हर्षा ने अपने पुराने विवादों का जिक्र करते हुए यह भी कहा कि उनके मंच संचालन (एंकरिंग और होस्टिंग) के काम को लेकर भी कुछ लोगों ने अनावश्यक आपत्ति जताई थी, शायद उन्हें उनके लाइमलाइट में आने से परेशानी थी। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि उनके खिलाफ कोई एक शब्द बोलेगा, तो उन्हें भी बहुत कुछ सुनना पड़ेगा। दूसरी ओर, अंजलि अरोड़ा को सीता का किरदार मिलने के बाद सोशल मीडिया पर हो रही आलोचनाओं पर अभिनेत्री का पक्ष भी पहले सामने आ चुका है। अंजलि ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि सोशल मीडिया के उनके मौजूदा काम और फिल्म में निभाए जा रहे किरदार को अलग-अलग नजरिए से देखा जाना चाहिए तथा कलाकारों की मेहनत का सम्मान करना चाहिए।

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